कहा जाता है कि एक बार नेपोलियन ने टिप्पणी की थी कि अगर 1812 में मास्को में घुड़सवारी करने के दौरान उन पर तोप के एक गोले से भी हमला किया जाता, तो वह इतिहास में एक महान व्यक्ति की तरह दफन हो जाते। उसी तरह अगर फिदेल कास्त्रो अपनी महानता के क्षणों से ज्यादा जीवित नहीं रहते, तो उनके प्रति रोमांस का आकर्षण खत्म हो जाता।
फिदेल, यह अकेला शब्द उस व्यक्ति की पहचान बन गया जिसने सिएरा मेस्त्रा में अपनी छोटी-सी सैन्य टुकड़ी के साथ शुरुआत करते हुए 1959 में फल्गनेशियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंका, क्यूबा को अमेरिकी वर्चस्व से मुक्त करा दिया, गरीबों के सशक्तिकरण की घोषणा की और साम्राज्यवाद से पोषित सरकार के खात्मे की लैटिन अमेरिकी आकांक्षा को आकार दिया।
अपने आंदोलन के दौरान उनके संदेश का असर बिजली की तरह होता था। फिदेल मौन ग्रामीणों के लिए दाढ़ी वाले नायक थे। एक असमान, भ्रष्ट महाद्वीप क्रांति के लिए पूरी तरह से तैयार था। अर्नेस्टो चे-ग्वेरा इस क्रांति को भड़काने के लिए 1960 के दशक के मध्य में हवाना से निकल चुके थे।
लैटिन अमेरिका का शायद ही कोई देश इस तूफान से बचा हो, सल्वाडोर अलेंदे के चिली से लेकर सैंडिनिस्टा क्रांति वाले निकारागुआ तक, अर्जेंटीना में वामपंथियों पर की गई क्रूर सैन्य कार्रवाई, जिसमें हजारों लोग गायब हो गए, से लेकर ब्राजील के क्रूर सैन्य शासक तक। फिदेल की जीत की वैचारिक ताकत विलक्षण थी।
अपने पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त उपन्यास द सिंपेथाइजर में वियत थान्ह न्यूगेन ने वर्णन किया है कि 'कैसे, जब हो ची मिन्ह 1975 में वियतनाम में विजय की ओर अग्रसर वामपंथी ताकतों का नेतृत्व कर रहे थे, उनके नायक ने किसी को बताया कि मैं भी उनमें से एक था, वामपंथियों का शुभचिंतक, शांति, समानता, लोकतंत्र, मुक्ति और स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाला क्रांतिकारी, मगर इन सब महान चीजों के लिए लड़ते हुए मेरे लोग मारे गए और मैं छिपकर बच गया।
फिदेल विश्वयुद्धों के बाद एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में उभरते गैर उपनिवेशवादी, गैर साम्राज्यवादी संघर्ष के महान नायक थे। लेकिन जिस तरह से वियतनाम में हो ची मिन्ह के साथ हुआ, उनके महान आदर्श भी काफी हद तक भ्रामक साबित हुए। फिदेल अप्रैल,1959 में अमेरिका आए थे और एनबीसी में मीट द प्रेस कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की थी कि स्वतंत्र धार्मिक आस्थाओं, मुक्त विचारों और चार वर्षों के भीतर स्वतंत्र चुनाव के साथ लोकतंत्र उनका लक्ष्य है। उन्होंने घोषणा की थी, 'मैं साम्यवाद से सहमत नहीं हूं।
जैसा कि स्वतंत्रता के दो दशक बाद क्रांतिकारी अमेरिका विरोधी ईरान में अयातुल्ला खुमैनी के स्वतंत्रता का वायदा पूरा नहीं हुआ, उसी तरह फिदेल ने अमेरिका के साथ वायदा खिलाफी की। उन्होंने मास्को और विशाल सोवियत रियायत को गले लगाया। इसी तरह मिसाइल खरीदकर 1962 में उन्होंने दुनिया को परमाणु युद्ध के कगार पर ला दिया था।
उनके सत्ता अधिग्रहण के तीन महीनों के भीतर 400 से ज्यादा विरोधियों को फायरिंग दस्तों द्वारा मार डाला गया, यह आंकड़ा बाद के वर्षों में बढ़कर 5,600 हो गया। दशकों में अनगिनत असंतुष्टों को जेल में डाल दिया गया। लाखों क्यूबाई फिदेल के सुरक्षा तंत्र से भागकर फ्लोरिडा चले गए। फिदेल की क्रांति के पचास वर्ष पूरे होने पर क्यूबा की यात्रा के बाद मैंने एक पत्रिका में लेख लिखा था कि प्रेस का मुंह बंद कर दिया गया है और सरकारी टेलीविजन प्रोपगेंडा मशीन बन गया है। उस यात्रा के दौरान मैंने लिखा था कि हवाना में समुद्र की दीवार पर बैठे क्यूबा के लोग समुद्री वैभव दिखाई देने के बावजूद शायद ही कभी बाहर की तरफ देखेंगे। मैंने एक असंतुष्ट ब्लॉगर याओनी सांचेज से इस बारे में पूछा, तो उसने बताया कि 'हम समुद्र से दूर रहते हैं, क्योंकि यह हमें जोड़ता नहीं, बल्कि बंद रखता है। इसमें कोई हलचल नहीं है। लोगों को नाव खरीदने की इजाजत नहीं है, क्योंकि अगर उनके पास नावें होंगी, तो वे फ्लोरिडा चले जाएंगे।'
एक रोमांटिक मुक्तिदाता फिदेल ने अपने द्वीप को जेल बना दिया, जो भयानक व्यवस्था द्वारा पैदा गरीबी में फंसे आलसी लोगों से भरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी कल्याण के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय सफलता उनकी मूलभूत विफलता को नहीं ढक सकती।
राष्ट्रपति ओबामा के क्यूबा के साथ राजनयिक संबंध बहाली की मैं सराहना करता हूं, जो इस वर्ष के शुरू में फिदेल के भाई और क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो से मिलने हवाना गए थे। राउल कास्त्रो 2006 में क्यूबा के राष्ट्रपति बने। अमेरिका और क्यूबा के बीच स्थगित राजनयिक संबंध एक कालदोष बन गया था। हालांकि फिदेल की मृत्यु पर ओबामा की कमजोर टिप्पणी की मैं निंदा करता हूं। किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि 'इतिहास उनकी विलक्षण छवि के प्रभाव को दर्ज करेगा और उसके साथ न्याय करेगा।' वर्ष 1959 से कास्त्रो के क्यूबा में काफी कुछ ऐसा है, जो निंदनीय है।
स्वतंत्रता के विचार के लिए मजबूती से खड़े होने और तानाशाही के खिलाफ मुक्त दुनिया के नेतृत्व करने के प्रति ओबामा की अनिच्छा के साथ-साथ अमेरिकी सत्ता के क्यूबा के प्रति कार्रवाई के लिए पछतावे या उलझन भरे स्वर ने बहुत से अमेरिकियों को नाराज किया है। इसका पता कुछ हद तक डोनाल्ड ट्रंप के प्रति अमेरिकियों के समर्थन से भी चलता है। क्यूबा ने दुनिया को ज्यादा खतरनाक बना दिया है। फिदेल के आक्रामक रुख का उल्लेख करने से इन्कार करना ओबामा डॉक्टरिन का ही हिस्सा है।
फिदेल की विशालता दोषपूर्ण थी। अंत में केवल उनका अमेरिका विरोधी राष्ट्रवादी विचार ही बचा रह गया था, जिसे वेनेजुएला में ह्यूगो शॉवेज द्वारा ग्रहण किया गया।