फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक ज्योतिषी को किसान की सीख

Fri, 08 Feb 2013 12:16 AM IST
शिवकुमार गोयल
विज्ञापन
विज्ञापन
जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है-इस तरह की सीख प्रायः सभी धर्मग्रंथों और नीतिशास्त्रों में दी गई है। बावजूद इसके लोग कर्मकांड और ज्योतिष आदि के चक्कर में पड़कर अपना इहलोक बिगाड़ लेते हैं। इसी से जुड़ी एक कहानी एक राजा की है, जो हर कार्य ज्योतिषी की सलाह से करता था। ज्योतिष पर अत्यधिक विश्वास के कारण राजकाज के कार्यों में बाधा पड़ती थी। एक दिन राजा राज-ज्योतिषी के साथ गांवों के भ्रमण को निकला।
विज्ञापन


मार्ग में एक किसान कंधे पर हल रखे हुए खेत की ओर जाता मिला। वह खेत जोतने जा रहा था। ज्योतिषी ने उसे रोका और कहा, अरे मूर्ख, आज तू पूरब दिशा की ओर क्यों जा रहा है? दिशाशूल के कारण तू जो कार्य करेगा, उससे तुम्हें हानि ही होगी।

किसान बोला, ज्योतिषी जी महाराज, मैं प्रतिदिन इसी दिशा में जाकर अपने खेतों की देखभाल करता हूं। यदि मैं दिशाशूल के अंधविश्वास में पड़ जाता, तो मेरी खेती कब की चौपट हो जाती। ज्योतिषी ने झेंपते हुए कहा, तनिक अपना हाथ तो दिखा। देखूं, तेरे भाग्य की रेखाएं क्या कहती हैं?
विज्ञापन


किसान ने जवाब दिया, किसी के सामने हाथ वह फैलाता है, जो कामचोर होता है। मैं हाथों से मेहनत कर अपना भाग्य बनाता हूं। खेतों में अन्न उपजाता हूं। मैं आपके सामने हाथ क्यों फैलाऊं? यह कहकर किसान आगे बढ़ गया। ये बातें सुनकर राजा का ज्योतिष के प्रति अंधविश्वास छंट गया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें