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स्याही फेंकने के गेम में फेम

Sun, 31 Jan 2016 06:33 PM IST
गौरव त्रिपाठी
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पापा ने घर पहुंच जैसे ही दरवाजा खोला, चिंटू ने उनके मुंह पर काली स्याही फेंक दी। पापा ने बौखलाकर चांटा मारते हुए कहा, अबे, मुझे क्या केजरीवाल समझ लिया है तूने। चिंटू ने गाल पर हाथ रखते हुए कहा-पापा मैं तो प्रैक्टिस कर रहा था। मैं सोच रहा हूं कि काली स्याही फेंकने में अपना भविष्य बनाऊं। इस गेम में खूब फेम है। क्रिकेट में अब पहले जैसा क्रेज नहीं है। निशाना लगे न लगे, बस मीडिया आसपास होनी चाहिए, इसका ध्यान रखना है। नेताओं की सभा में जूते, चप्पल फेंकने का भी जमाना गया। जूते चप्पलों से बचना भी नेता सीख गए हैं। लेकिन स्याही से बचने का कोई चांस नहीं। दो-चार बूंदें तो पड़ ही जाती हैं।
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पापा फिर उखड़े, अबे तो प्रैक्टिस बाहर जाकर दूसरे लोगों पर करो। मुझ पर क्यों? चिंटू ने समझाया, पापा आपने ही तो समझाया है कि अच्छे काम की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए और गलत लोगों का विरोध करना चाहिए। मुझे अच्छे स्कूल में न डालकर आपने घोटाला किया है। मेरे कपड़ों की खरीद में भारी धांधली हुई है। मुझे चॉकलेट की जगह टॉफी देकर लाखों का चूना लगाया गया है। मैं मांग करता हूं कि इसकी जांच एमएनएन (मम्मी-नाना-नानी) कमेटी से कराई जानी चाहिए। आपको इस पर श्वेत पत्र जारी करना होगा।

चिंटू को आगबबूला होता देख पापा घबराए, अबे शांत हो जा। इसमें विरोधी पार्टी (पड़ोसी अंकल) की साजिश नजर आती है। देश प्रेम का पाठ पढ़ाकर उसने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में डाल रखा है। और दूसरों को भड़काता है, ताकि कोई उसकी तरफ उंगली न उठा सके।
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चिंटू पापा की बात से सहमत नहीं हुआ, दूसरों पर इल्जाम लगाकर आप बच नहीं सकते। जांच तो होगी ही। चिंटू को नेताओं की भाषा बोलते देख पापा ने समझाया, नेताओं को काली स्याही लगवाने की आदत होती है। मैं अभी नया हूं, थोड़ा समय दे बेटा। लेकिन चिंटू ने नहीं माना और काली स्याही फेंकने की प्रैक्टिस कर रहा है।
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