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निर्यात के रास्ते रोजगार की उम्मीद

जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 12 Dec 2017 06:37 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
पांच दिसंबर को बहुप्रतीक्षित विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) की  मध्यावधि समीक्षा में सरकार ने श्रम आधारित रोजगारपरक वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की है। सरकार के इस कदम से निर्यातकों को सालाना करीब 8,450 करोड़ रुपये की रियायतों का लाभ होगा। चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन, खेल के सामान, कृषि, समुद्री उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों सहित अन्य सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। श्रम बहुल उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उपक्रमों वाले समूचे क्षेत्र के लिए भारत से वस्तु निर्यात योजना के तहत प्रोत्साहन दर दो फीसदी बढ़ाई गई है। भारत से सेवाओं के निर्यात योजना प्रोत्साहन को भी दो फीसदी बढ़ाया गया है। इससे कानूनी, एकाउंटिंग, वास्तुकला, शिक्षा एवं अन्य सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।


साथ ही प्रतिभूतियों के हस्तांतरण और बिक्री पर लगने वाली जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया तथा उसकी वैधता अवधि मौजूदा 18 माह से बढ़ाकर 24 माह की गई है। सेकंड हैंड, पुरानी पूंजीगत वस्तुओं के आयात से पाबंदी हटाई गई है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के आपूर्तिकर्ताओं के लिए जीएसटी शून्य किया गया है। नए बाजारों और नए उत्पादों की संभावनाएं तलाशने और परंपरागत बाजारों तथा उत्पादों के निर्यात में भारत का हिस्सा बढ़ाने के लिए नई रणनीति भी पेश की गई है। विशेषज्ञों ने विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा के बाद कहा है कि निर्यात प्रोत्साहन से जहां रोजगार में तेजी आएगी, वहीं कुछ हद तक निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए राहत मिलेगी।


हालांकि निर्यातक अधिक प्रोत्साहनों की उम्मीद संजोए हुए थे। यदि हम विदेश व्यापार संबंधी नवीनतम आंकड़ों को देखें, तो पाते हैं कि अप्रैल से अक्तूबर, 2017 के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 88 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले साल की तुलना में 60 फीसदी अधिक है। निस्संदेह निर्यात के नए चिंताजनक आंकड़ों ने निर्यात लक्ष्य के सामने प्रश्न चिह्न लगा दिया है।


भारतीय निर्यातकों के संगठन फियो का कहना है कि भारत के मुकाबले कई छोटे-छोटे देश मसलन, बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड आदि ने अपने निर्यातकों को भारी सुविधाएं देकर भारतीय निर्यातकों के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा खड़ी कर दी है। ऐसे में निर्यात को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए और सभी निर्यातकों के लिए ब्याज सब्सिडी बहाल की जानी चाहिए। सरकार को निर्यात कारोबार के कमजोर बुनियादी ढांचे को भी सुधारना होगा और कुछ ऐसे देशों के बाजार भी जोड़ने होंगे, जहां गिरावट अधिक नहीं है। श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान में भारत का निर्यात बढ़ सकता है।


निर्यात बढ़ाने के लिए कई और जरूरतों पर ध्यान देना होगा। निर्यातकों के हित में मानकों में बदलाव किया जाए, जिससे कार्यशील पूंजी पर असर न पड़े। सरकार द्वारा अन्य देशों की गैर शुल्कीय बाधाएं, मुद्रा का उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क अधिकारियों से निपटने में मुश्किल और सेवा कर जैसे निर्यात को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। देश से कृषि निर्यात भी बढ़ाने को प्रोत्साहन देना होगा। कृषि निर्यात को गति देने के लिए व्यापार प्रतिबंधों को भी हटाने की जरूरत है। निर्यात बढ़ाने के लिए निर्यात प्रक्रिया के पूरे खर्च को कर मुक्त करना तथा निर्यात विकास कोष का गठन जरूरी है। साथ ही जीएसटी बकायों का तेजी से निस्तारण भी जरूरी है।
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