आतंकित होकर कुछ लोग यमराज जी की शरण में पहुंचे। यमराज ने उन्हें पास बिठाया, अपने अनुचर से ठंडे पानी की बोतल मंगाकर जल पिलवाया। लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई, महाराज, आपकी इच्छा के विरुद्ध इस मृत्युलोक से जीव पलायन नहीं कर सकता। आपकी कृपा होगी, तो कुछ समय तक हम चैन से सांस ले सकेंगे।
यमराज ने अपना बहीखाता खोलते हुए कहा, आतंकित होने की जरूरत नहीं है। अपना नाम बताइए, आईडी प्रूफ दीजिए, मैं आपके जीवन से संबंधित सूचनाएं आपको प्रदान करूंगा।
लोगों ने अपने नाम बताने शुरू किए। बहीखाते में नजरें गड़ाते ही यमराज की आंखें विस्मय से फैल गईं। उन्होंने पूछा, सच बताना, आप लोगों ने भी क्या व्यापम की व्यापकता में स्वयं को समर्पित कर बहती धारा में हाथ धोए हैं? क्या अपने परिचितों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाया है? किसी खास को नौकरी दिलाने के नाम पर कमीशन खाया है?
लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। एक सज्जन रुआंसे होकर बोले, यमराज जी, आपसे क्या छिपाना। हममें से ज्यादातर के खिलाफ व्यापम घोटाले में रपट दर्ज हैं। हमने यह सोचकर व्यापम में अपनी भागीदारी निभाई थी कि देश का कोना-कोना व्यापम हो गया है। हिमाचल से लेकर उत्तर प्रदेश तक। मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक। जिधर नजर दौड़ाओ, उधर ही व्यापम। हमने सोचा, यदि हम व्यापम सरीखे हमाम में स्नान कर लेंगे, तो हमारा भी कुछ नहीं बिगड़ेगा। मगर जब से हमारे घोटालेबाज मित्र मृत्यु की चपेट में आने लगे हैं, तब से हमारी चिंता बढ़ गई है। ऐसा कोई उपाय बताइए कि हम पर भी उत्तर प्रदेश के एनआरएचएम घोटाले और बिहार के चारा घोटाले की तरह नरमी बरतने जैसी मेहरबानी हो जाए।
यमराज गुर्राए, नामुरादो, घोटाला करते समय तुम लोगों ने यह सब नहीं सोचा! अब मैं कुछ नहीं कर सकता। तुम लोगों ने आने में देर कर दी। मैं पहले ही तुम लोगों के डेथ वारंट पर साइन कर चुका हूं।