फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

दुनिया की शीर्ष 10 कंपनियां: यूरोप को अतीत नहीं, भविष्य की जरूरत; नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान भी अहम

निकोलस क्रिस्टॉफ, वरिष्ठ अमेरिकी पत्रकार Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 09 Sep 2024 05:20 AM IST

सार

अमेरिका के पास एपल, गूगल और मेटा हैं, लेकिन दुनिया की शीर्ष 10 तकनीकी कंपनियों की हाल ही में जारी की गई सूची में एक भी यूरोपीय कंपनी नहीं है। अफ्रीका का छोटा-सा देश सेशल्स तक यूनिकॉर्न कंपनियों के मामले में कई यूरोपीय देशों से आगे है। समृद्ध अतीत वाले यूरोप को भविष्य की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
समृद्ध अतीत वाले यूरोप को भविष्य की जरूरत - फोटो : अमर उजाला


इस बीच, यूरोप की जनसंख्या इस दशक में चरम पर है और 14वीं सदी में ब्लैक डेथ (प्लेग फैलने) के बाद पहली बार इसमें उल्लेखनीय गिरावट आने वाली है। जनसंख्या में गिरावट और समाजों की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया इस तरह से जारी रहने की आशंका है, जिससे महाद्वीप का प्रभाव कम हो जाएगा। सैन्य दृष्टि से पश्चिमी यूरोप अमेरिका पर निर्भर है और अपने दम पर रूस का मुकाबला करने में असमर्थ है। पोलैंड और बाल्टिक राज्य अपनी पूरी ताकत लगाए हुए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से यूरोप में आज कोई वास्तविक नेता नहीं है : जर्मनी के चांसलर इस भूमिका को निभा सकते हैं, लेकिन ओलाफ शोल्ज एंजेला मर्केल की छाया मात्र हैं। कभी इस क्षेत्र का इंजन रहे जर्मनी को अब कभी-कभी यूरोप का बीमार देश कहकर खारिज कर दिया जाता है। आंशिक रूप से इसलिए यह चिंता बढ़ रही है कि लड़खड़ाती जर्मन सरकार यूक्रेन को समर्थन देना बंद कर सकती है। इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों नेतृत्व करने को तैयार हैं, हालांकि कोई नहीं चाहता कि वह ऐसा करें। मैक्रों ने अप्रैल में सोरबोन में चेतावनी दी थी, 'हमारा यूरोप नष्ट हो सकता है'; वह इस खतरे के प्रति सजग हैं, लेकिन देश या विदेश में उनके बहुत कम सहयोगी हैं।


वर्ष 2005 में राजनीतिक वैज्ञानिक मार्क लियोनार्ड ने अपनी पुस्तक में बताया कि 'क्यों यूरोप 21वीं सदी को चलाएगा।' लेकिन एक यूरोपीय गणना के अनुसार, यदि अर्थव्यवस्थाएं वर्तमान गति से बढ़ती रहीं, तो 2035 तक औसत अमेरिकी और औसत यूरोपीय आर्थिक रूप से उतने ही दूर हो जाएंगे, जितने आज औसत यूरोपीय और भारतीय हैं। निष्पक्ष रूप से कहें, तो अंतर का आकलन इस बात पर भी निर्भर करता है कि किस विनिमय दर का उपयोग किया जाता है। अंतर बढ़ने का एक कारण यह हो सकता है कि राष्ट्रपति बाइडन के नेतृत्व में अमेरिका कंप्यूटर चिप्स, बैटरी और हाई-स्पीड इंटरनेट में निवेश कर रहा है; जबकि यूरोपीय संघ अपने बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवंटित करता है, कभी-कभी अधिक उत्पादन के लिए सब्सिडी देता है, ताकि यूरोप को तथाकथित अत्यधिक वाइन उत्पादन को हैंड सैनिटाइजर में बदलने के लिए भुगतान करे। नतीजतन यूरोप के 'प्रतिस्पर्धात्मक संकट' के बारे में चिंता बढ़ रही है।


इस साल गर्मियों में ब्रुसेल्स में त्रिपक्षीय आयोग की बैठक में मैंने बार-बार इस विचार के विभिन्न रूपों को सुना कि 'अमेरिका नवाचार करता है', जबकि 'यूरोप विनियमन करता है।' हाल के दशकों में, मेरा मानना है कि यूरोप उपभोक्ताओं को एकाधिकार और जहरीले रसायनों से बचाने में बेहतर रहा है। लेकिन मेरे जैसे उदारवादियों को इस बात से सावधान रहना चाहिए कि यूरोप में अत्यधिक विनियमन और कमजोर शासन इस महाद्वीप के भविष्य को कमजोर कर सकता है। निष्पक्षता से कहें, तो आलोचक कभी-कभी यूरोप को एक व्यंग्यात्मक छवि में बदल देते हैं, इसकी विशाल शक्तियों को अनदेखा कर देते हैं। लोगों को आलसी बनाने के बजाय, मानव पूंजी में इसके निवेश ने लोगों को काम करने के लिए सशक्त बनाया है: उत्तरी यूरोप में श्रम शक्ति भागीदारी दर अमेरिका की तुलना में अधिक है। इसका एक कारण यह भी है कि यूरोप बच्चों की देखभाल के मामले में बेहतर है, जिससे माता-पिता के लिए नौकरी करना आसान हो जाता है।


यह भी सच है कि संकट कभी-कभी जीवन शक्ति के नए विस्फोटों को जन्म देते हैं। लगभग 15 साल पहले यूनान काफी निराशाजनक लग रहा था। अब यह यूरोप में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है। 1990 के दशक में आर्थिक संकट के बाद स्वीडन ने खुद को फिर से स्थापित किया और वैश्विक नवाचार और उद्यमिता में अग्रणी बन गया। और एस्टोनिया! 1990 के दशक में कौन शर्त लगा सकता था कि 2024 में दुनिया के सबसे हाई-टेक देशों में से एक छोटा-सा एस्टोनिया होगा, जो अब भी उस देश के बगल में रह रहा होगा, जिसने कभी इसे आतंकित किया था? एस्टोनिया आज दुनिया के सबसे डिजिटल रूप से समृद्ध देशों में से एक है, और यह याद दिलाता है कि यूरोप के आर्थिक इंजन उन जगहों पर जा सकते हैं, जो कभी हाशिये पर थे।

फिर भी यूरोप को अपने अतीत की तरह ही भविष्य की भी जरूरत है। मुझे डर है कि जब तक यह निरर्थक, लेकिन महंगे नियमों को खत्म नहीं करता, नवाचार को नहीं अपनाता और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं करता, तब तक यह दुनिया के उदारवादियों के लिए आदर्श से ज्यादा एक चेतावनी बना रहेगा।       

विज्ञापन
विज्ञापन
Next