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एक संभावना का अंत 

तस्लीमा नसरीन
Updated Mon, 27 Jul 2020 07:22 AM IST
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taslima nasreen - फोटो : social media
फाहिम सालेह बहुत कम उम्र में 50 करोड़ डॉलर के मालिक हो गए थे और न्यूयॉर्क शहर के समृद्ध इलाके में  उन्होंने करीब 20 लाख डॉलर में एक शानदार फ्लैट खरीदा था। हालांकि फाहिम से जुड़े इस तथ्य ने मुझे प्रभावित नहीं किया था। इसके बजाय उनकी असाधारण मेधा, सोचने की क्षमता और एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी देशों के लोगों का कष्ट दूर करने की दिशा में उनके निरंतर प्रयत्नों ने मुझे बेहद प्रभावित किया था। 


उन्होंने अपने काम की शुरुआत छोटे स्तर पर की थी, लेकिन जिंदा रहने पर वह स्वप्नदर्शी युवा संभवतः कुछ बड़ा कर सकते थे। उनका जिंदा रहना बहुत जरूरी था। लेकिन न्यूयॉर्क पुलिस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इक्कीस साल के टायरस डेवन हास्पिल ने उन्हें जिंदा नहीं रहने दिया। कभी फाहिम ने उसे अपने सहयोगी के तौर पर नौकरी पर रखा था। जब वह एक लाख डॉलर की चोरी करने के बाद पकड़ा गया, तो नौकरी से निकालने के बजाय फाहिम ने उसके सामने किस्तों में वह डॉलर चुका देने का प्रस्ताव रखा। 


लेकिन पैसा चुकाने के बजाय टायरस ने फाहिम को मार डालने का विकल्प चुना। और वह हत्या भी उसने बेहद नृशंस तरीके से की। इक्कीस साल के टायरस ने संभवतः पहली बार हत्या की है। लेकिन पुलिस ने इसे किसी पेशेवर हत्यारे का काम बताया। बहुत लोगों का मानना है कि युवा अमूमन निरीह, कोमल और आदर्शवादी होते हैं। लेकिन नृशंसता में ये पेशेवर हत्यारों से कम नहीं होते। ढाका के गुलशन कैफे पर जिन लोगों ने धावा बोला था, वे सब के सब युवा ही थे, लेकिन दुनिया जानती कि उन्होंने किस क्रूरता का परिचय दिया था।


धर्म के लिए जिस तरह अमानुषिकता का परिचय दिया जा सकता है, वैसे ही रुपये-पैसे के लिए भी दिया जा सकता है। न्यूयॉर्क की पुलिस ने तीन-चार दिन के भीतर ही खूनी की शिनाख्त कर ली। हमारे यहां इस तरह की हत्या होती, तो खूनी शायद कभी पकड़ा भी न जाता। लेकिन एक चीज मेरी समझ में नहीं आई। वह यह कि फर्स्ट डिग्री मर्डर के बजाय इसे सेकेंड डिग्री मर्डर क्यों कहा जा रहा है? जाहिर है, सेकेंड डिग्री मर्डर होने पर टायरस को कम सजा मिलेगी। बेहद ठंडे दिमाग से हत्या करने के लिए ही तो टायरस अपने बैग में स्टेनगन, छुरी आदि लेकर फाहिम के फ्लैट में गया था।


ब्रुकलिन स्थित टायरस के फ्लैट से वह काली पोशाक भी बरामद की जा चुकी है, जिससे खुद को आपादमस्तक ढककर टायरस हत्या के दिन लिफ्ट में फाहिम के पीछे-पीछे गया था। विकसित विश्व में बांग्लादेश के लोगों के बारे में, दुर्योग से, बहुत अच्छी धारणा नहीं है। उनकी छवि बेवकूफ, चोर-बदमाश, खूनी, बलात्कारी, धर्मांध, धोखेबाज और आतंकवादी आदि की है। इन सबके बीच फाहिम एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर थे, जिनके बारे में हम गर्व कर सकते थे। लेकिन एक अपराधी ने अपनी सनक में एक विराट संभावना को खत्म कर दिया। टायरस ने जिस तरह से इस हत्याकांड को अंजाम दिया, उसके बारे में जानकर ही झुरझुरी पैदा होती है। 


इस हत्याकांड का रहस्य उजागर होने के बाद निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि इस ब्रह्मांड में मानव मस्तिष्क के बारे में हम सबसे कम जानते हैं। टायरस की ही बात करें, तो फाहिम की हत्या करने के बाद वह स्वाभाविक जीवन जी रहा था। शहर छोड़कर भाग जाने की कोशिश तो दूर, वह हत्याकांड को अंजाम देने की जगह से थोड़ी ही दूर स्थित एक इलाके में रह रहा था। फाहिम के क्रेडिट कार्ड से ही उसने अपनी प्रेमिका के जन्मदिन पर गुब्बारे खरीदे थे। जिस आदमी की उसने हत्या की, उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए उसी के क्रेडिट कार्ड से उसने बिजली की आरी खरीदी, फाहिम के फ्लैट में अपनी उंगलियों के तमाम निशान मिटाने के लिए उसने उसी के क्रेडिट कार्ड से हैंडी वैक्युम क्लीनर खरीदा। 


यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि विभिन्न तरह के एप बनाकर प्रसिद्ध और समृद्ध हो जाने के बावजूद फाहिम का कोई बॉडीगार्ड क्यों नहीं था, उनके घर में सीसीटीवी और आधुनिक सुरक्षा की कोई व्यवस्था क्यों नहीं थी? लिफ्ट के सीसीटीवी में सिर्फ तस्वीर ही दिखती है, आवाज सुनाई नहीं पड़ती। इतनी बेशकीमती बिल्डिंग में सुरक्षा के मोर्चे पर ऐसी बदहाली क्यों थी, यह कोई नहीं जानता। यह मानने का कारण है कि टायरस को इस बारे में मालूम था। तभी तो उसने बेहद ठंडे दिमाग से इस हत्या की रूपरेखा बनाई। फाहिम ने जब टायरस को नौकरी पर रखा, तब उसकी उम्र महज सोलह साल थी। टायरस की मां मानसिक रूप से बीमार थी और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पिता ने उसे अपने साथ नहीं रखा था, नतीजतन छोटी उम्र से ही शरण पाने के बदले टायरस को अपने रिश्तेदारों से अपमान सहना पड़ा था। 
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इस तरह की पृष्ठभूमि कई बार अपराध को जन्म देती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों के अपमान और अवहेलना का बदला लेने के लिए टायरस ने उस व्यक्ति को चुना, जो उसका जीवन संवार रहा था। एक बार हत्या कर चुका व्यक्ति बार-बार हत्या कर सकता है। खासकर युद्धक्षेत्र से लौटे सैनिकों में यह प्रवृत्ति ज्यादा पाई जाती है। वियतनाम से लौटे कितने ही अमेरिकी सैनिकों का जीवन बर्बाद हो गया था और कोशिशों के बावजूद वे स्वाभाविक जीवन में नहीं लौट पाए थे। बांग्लादेश के मुक्तियुद्ध में भाग लेने वाले कितने ही लोग आजादी के बाद भी हथियार लेकर खून-खराबे में लगे हुए थे। मौजूदा संदर्भ में दुखद बात यह है कि एक प्रतिभाशाली बंगाली युवा को असमय ही इस पृथ्वी से विदा होना पड़ा। उसका दोष क्या था? 


यही कि वह मानसिक परेशानियों से त्रस्त एक युवक की असलियत नहीं भांप पाया था। यह विडंबना ही है कि इस पृथ्वी पर लोगों को अपनी मासूमियत की कीमत बार-बार चुकानी पड़ती है! इस दुनिया में जितने प्रतिभाशाली लोग हैं, जो लोग इस पृथ्वी को और सुंदर तथा रहने योग्य बनाने की निरंतर कोशिशों में लगे हैं, उनका जीवित रहना बहुत जरूरी है, फाहिम सालेह की नृशंस हत्या यह बात हमें बार-बार याद दिलाती है।

 
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