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मुझे कोई प्रधानमंत्री नहीं बनाता

Tue, 12 Mar 2013 10:02 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
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साधो, वह लाख कहें कि प्रधानमंत्री नहीं होना चाहते, लेकिन वही इस पद के लायक हैं। बल्कि उनकी मनाही को उनकी विनम्रता मान लेना चाहिए। उनमें प्रधानमंत्री बनने की सारी योग्यताएं और क्षमताएं हैं। उन्हें इस कुर्सी पर बैठने से कौन रोक सकता है! यह कुर्सी बनी ही उनके लिए है। उनके बैठने से इस पद की गरिमा बढ़ेगी। पद की गरिमा बढ़ाने वाली शख्सियतें जन्मजात ही होती हैं। हमारे यहां प्रतिभाओं का अवतरण बड़े घरों में ही होता है।
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दरअसल छोटे घरों में प्रतिभा का व्यक्तित्व समाता ही नहीं है। बड़े घरों में पैदा होकर महान होना आसान होता है। आप बड़े घर की संतान हैं, तो महान बन ही जाएंगे। मैं महान नहीं बन सका, तो इसलिए कि मेरा जन्म किसी बड़े कुल में नहीं हुआ। मैं बड़े खानदान में उत्पन्न होता, तो पालने में ही हमारे जैसे पूत के पांव दिख जाते।

अब देखो, जन्म मिला भी तो ऐसे घर में, जहां पालना था ही नहीं। ऐसे में पांव दिखते भी तो कहां से। हमारे जैसे लोगों के पांव राजपथ के लायक नहीं होते। जो राजमार्गों पर चलायमान होते हैं, वे ही चरण कमलों के मालिक हुआ करते हैं, जिनका स्पर्श करके हम लोग धन्य हो जाते हैं।
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हमारे हाथ की रेखाओं में राजयोग नहीं पाया जाता। पेशेवर ज्योतिषी हमारी कुंडलियां नहीं बांचते। मुझे कोई नहीं कहता कि मैं प्रधानमंत्री बन जाऊंगा। दोस्त और पड़ोसी भी नहीं, जबकि प्रधानमंत्री बनने की सारी योग्यताएं मेरे पास हैं। मुझे इस देश के इतिहास की जानकारी है और इसके भूगोल से भी मैं बखूबी परिचित हूं।

इस देश की जनता-जनार्दन को भी मैं जानता हूं। उसके दुख-तकलीफों और जरूरतों का मुझे ज्ञान है। मैं इससे भी परिचित हूं कि गरीबी का कारण जन्मजात नहीं, इसके व्यवस्थागत दोष हैं। फिर भी मैं इस देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। प्रधानमंत्री तो क्या, मैं सभासद और ग्राम प्रधान भी नहीं बन सकता।

लोग कहते हैं कि आदमी होने के लिए जिन न्यूनतम चीजों की दरकार है, वे मेरे पास नहीं हैं। जैसे, भोजन करते हुए छुरी और कांटे का इस्तेमाल करना मैं नहीं जानता। नपी-तुली हंसना मेरे बस की बात नहीं।

मेरे कंधे पर एक अदद अंगोछा पड़ा रहता है, जो मुझे देहाती साबित कर देता है। मेरे शरीर से टेलकम की नहीं, पसीने की गंध आती है। मुझे सत्ता की भाषा यानी अंग्रेजी भी नहीं आती। ऐसे में मैं प्रधानमंत्री भला कैसे बन सकता हूं।
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