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छवि खराब करने की कोशिश

Mon, 04 Jul 2016 05:28 PM IST
तवलीन सिंह
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तवलीन सिंह
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नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले सप्ताह किसी भारतीय टीवी चैनल को अपना पहला इंटरव्यू दिया। वह खुशकिस्मत चैनल था टाइम्स नाउ और भाग्यशाली पत्रकार थे अर्नब गोस्वामी। अर्नब ने कई सवाल किए प्रधानमंत्री से और उन्होंने बेझिझक उत्तर दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब उनकी पार्टी के लोग सिर्फ प्रचार पाने के लिए उल्टे-सीधे बयान देते हैं, तो उन्हेंे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। मीडिया को फटकार लगाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि आप लोग ऐसे लोगों को हीरो क्यों बना देते हो? अगले दिन अखबारों में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को ऐसे पेश किया गया, जैसे उनके निशाने पर भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी थे, जिन्होंने रघुराम राजन के बारे में कहा था कि उनकी मानसिकता भारतीय नहीं है।
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जिस दिन प्रधानमंत्री का यह इंटरव्यू आ रहा था, उसी दिन कई अन्य टीवी चैनलों पर रिजवान और मुख्तार नाम के दो नौजवानों की तस्वीरें दिखाई गईं, जिन्हें हरियाणा के गौ रक्षक दल के सदस्यों ने जबर्दस्ती सड़क किनारे बिठाकर गोबर खिलाया था। उन नौजवानों का अपराध सिर्फ यह था कि वह अपने ट्रक में गाय लेकर जा रहे थे। इन दो नौजवानों को गोबर खाते समय कई बार उल्टियां हुईं, लेकिन जबरन दंड देने वाले गौ रक्षक दल के लोग उनसे 'जल्दी खाओ, जल्दी खाओ' कह रहे थे। टीवी पर यह दृश्य देखकर खुद मुझे उलटी आने लगी।

मैंने जब इस पर ट्वीट किया, तो कई लोगों ने जवाबी ट्वीट करके मुझे यह कहते हुए डांटा कि अपने देश में गोबर खाना प्रसाद माना जाता है और बीफ खाना महापाप। हो सकता है, उनकी बात सही हो, लेकिन सवाल कानून-व्यवस्था को कायम रखने का है। जिन देशों में कुछ गुंडे कानून को अपने हाथों में ले लेते हैं, उन देशों का भला कभी नहीं होता। यहां यह कहना जरूरी है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए सरकार आने के बाद से ऐसी घटनाएं कुछ ज्यादा ही होने लगी हैं, क्योंकि ऐसा लगता है कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां गौ रक्षकों को कुछ ज्यादा ही छूट मिल गई है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को हो रहा है। हरियाणा की यह घटना अगर अर्नब गोस्वामी द्वारा लिए गए इंटरव्यू से पहले हुई होती, तो वह प्रधानमंत्री से इस बारे में सवाल कर सकते थे।
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भारत ने विश्व को विचारों के तौर पर जो सबसे बड़ी चीज दी है, वह यह है कि हर इंसान को अपने तरीके से भगवान की वंदना करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। यह सोच इतनी  व्यावहारिक है कि अनेक विदेशी इस सोच की खोज में अरसे से भारत आते रहे हैं। लेकिन सनातन हिंदू धर्म की इस सोच को जिस तरह समाप्त किया जा रहा है, उसे देखते हुए अब विदेशी शायद यहां आना ही बंद कर देंगे।

गायों की सेवा करना अच्छी बात है, लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आता कि गौ रक्षक दल के ये लोग उन लावारिस गायों की सेवा में क्यों नहीं लगते, जो वृद्ध और बीमार हालत में दर-दर भटकती फिरती हैं। देश के हर शहर, हर कस्बे में सड़कों पर या कूड़े के ढेर के आसपास ये लावारिस गायें मिल जाएंगी। इन गायों को देखकर किसी की ममता आखिर क्यों नहीं जागती? इसके बजाय समाज में हिंसा का माहौल बनाकर तो वे देश का नुकसान ही कर रहे हैं।
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