मई 2019 में नई सरकार का गठन होते ही नई शिक्षा नीति का मसौदा पेश किया गया था। पिछली शिक्षा नीति लगभग तीन दशक पहले आई थी। इस बात से शायद ही किसी को इनकार होगा कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की काफी आवश्यकता है। इसी वर्ष प्रकाशित टाइम्स ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में हमारे देश का भारतीय विज्ञान संस्थान भी शीर्ष दो सौ विश्वविद्यालयों की सूची में अपना स्थान नहीं बना सका। भारतीय संस्थानों की सबसे कमजोर कड़ी 'अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण' रहा। यानी भारतीय शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय धारा से जोड़ने की आवश्यकता है।
नई शिक्षा नीति-2019 के मसौदे में निम्न स्तर के सभी कॉलेजों को बंद करने और अच्छे कॉलेजों को विश्वविद्यालयों का दर्जा देने पर जोर दिया गया है। इसका नतीजा यह होगा कि कई छोटे कॉलेज, खासकर छोटे शहरों के बंद हो जाएंगे और उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या घट जाएगी। बेशक शिक्षा में सुधार के लिए यह आवश्यक होगा, पर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को भी उच्च शिक्षा के अवसर मिलते रहें।