वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में श्वेत पत्र के माध्यम से यूपीए सरकार के कार्यकाल की नाकामियों और मोदी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों को आम जनता के समक्ष रखते हुए बताया कि 2014 से पहले देश आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, जिसके कारण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मोदी सरकार को बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी। इसके जवाब में कांग्रेस ने ब्लैक पेपर पेश किया, जिसमें मोदी सरकार की नाकामियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भाजपा लोकतंत्र को समाप्त करने का काम कर रही है और इसके कार्यकाल में बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, भारत की जीडीपी वर्तमान मूल्य पर अभी 37.3 खरब डॉलर की है, जबकि आजादी के समय भारत की जीडीपी 227 अरब डॉलर की थी। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बैंकिंग और आर्थिक क्षेत्र में कई सुधार किए, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का शुभारंभ, बैंकों का आपस में विलय, प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम-स्वनिधि योजना, अटल पेंशन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (आईबीसी) आदि का आगाज।
द इंडियन इकनॉमी
ए रिव्यू रिपोर्ट में मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों के सफर को आर्थिक सुधारों के संदर्भ में बहुत ही अहम बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में नॉमिनल जीडीपी के सात प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी के 7.3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ने का अनुमान जताया गया है। यही नहीं, यह संभावना भी जताई गई है कि भारत की जीडीपी 2030 तक सात प्रतिशत की दर से आगे बढ़ सकती है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ग्लोबल ने भी भारत के वित्तीय क्षेत्र में आई मजबूती और सरकार द्वारा किए गए हालिया संरचनात्मक सुधारों की वजह से सरकार के इस दावे की पुष्टि की है। ऐसे में, 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 50 खरब डॉलर और 2030 में 70 खरब डॉलर से भी अधिक का हो जाएगा। पीपीपी के मामले में 2023 में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जबकि चीन और अमेरिका क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर थे।
अस्सी के दशक में पहली बार, वित्त वर्ष 1989-90 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) सूचकांक ने 1,000 के अंक के स्तर को पार किया था। वर्ष 2006 में बीएसई सूचकांक ने 10,000 अंक के स्तर को पार किया। फिर वित्त वर्ष 2014-15 में यह 30,000 अंक के स्तर को और वित्त वर्ष 2018-19 में 40,000 अंक के स्तर को पार किया। वित्त वर्ष 2023 में रिकॉर्ड 70,000 अंक के स्तर को पार कर गया। निफ्टी सूचकांक भी वर्ष 2023 में रिकॉर्ड 21,000 अंक के स्तर को पार कर गया।
भारत में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी दर नियंत्रण में है। इसके अलावा, प्रति व्यक्ति आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आगामी वर्षों में भी मजबूती बनी रहेगी। बेशक जीडीपी के अनुपात में सरकारी कर्ज का प्रतिशत अधिक है, लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य कर व गैर-कर राजस्व संग्रह में आ रही तेजी से इसमें आने वाले वर्षों में कुछ कमी आने की संभावना है।