भारत ने पिछले वर्ष 2024-25 में 50 अरब डॉलर मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा है। यह भारत के कच्चे तेल के कुल आयात बिल का 35 फीसदी से अधिक है। यूक्रेन युद्ध के कारण प्रतिबंध लगने पर रूस ने रियायती कीमतों पर अपना कच्चा तेल बेचना शुरू किया, जिसका फायदा उठाते हुए भारत ने रूस से तेल आयात शुरू किया। इसलिए भारत कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों के उछाल से बचा हुआ दिखाई दे रहा है। यही नहीं, भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों का विस्तार कर लिया है। भारत करीब 40 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। इस समय इस्राइल-ईरान युद्ध से जहां दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, वहीं भारत में महंगाई घटी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा महंगाई दर महज 2.82 प्रतिशत है और थोक महंगाई दर महज 0.39 फीसदी ही है। यह पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर है।
विगत 6 जून को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए रेपो रेट में 50 आधार अंकों यानी 0.50 प्रतिशत की कटौती का ऐलान करके एक साहसिक कदम उठाया है। अब रेपो रेट छह प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत हो गई है। मौजूदा परिस्थितियों में आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने का आरबीआई का यह महत्वपूर्ण प्रयास है तथा इससे बाजार मांग में मजबूती और निवेश के नए माहौल को बल मिलेगा।
भारत खाद्यान्न के मोर्चे पर अत्यधिक मजबूत है। देश के खाद्यान्न भंडार में एक साल से भी अधिक की जरूरत के लिए गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष खाद्यान्न उत्पादन लगभग 6.5 फीसदी बढ़कर 35.39 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत के कृषि निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। देश का कुल कृषि निर्यात 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। इस वर्ष अच्छा मानसून देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक लाभप्रद है। इसके अलावा, भारत के पास युद्ध के दौर में दवाइयां सहित अन्य सभी जरूरी वस्तुओं के पर्याप्त भंडार भी हैं। भारत के निर्यात आदेश बढ़ रहे हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 13 जून, 2025 को भारत के पास 697 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे भारत किसी भी आर्थिक जोखिम का सरलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर, 2025 तक भारत साफ तौर पर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
निस्संदेह इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध लंबा खिंचने की आशंका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौती और अनिश्चितता पैदा कर दी है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में भी कमी आएगी, तो भारत पर भी इन सबका असर दिखाई देगा। ईरान और इस्राइल के संघर्ष का असर वैश्विक जल मार्ग पर भी पड़ सकता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर, जो वैश्विक माल ढुलाई का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया को मिलने वाले करीब एक तिहाई तेल और खाद्य व कृषि उत्पादों का यातायात इसी मार्ग से होता है। ऐसे में, इस मार्ग के बाधित होने से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावी हो सकती है। इसलिए भारत को वैश्विक आपूर्ति में कमी आने की आशंका के बीच चुनौतियों से निपटने की रणनीतिक योजना तैयार करनी होगी।