काउंसिल ऑन एनर्जी, इनवायरनमेंट ऐंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के अनुसार, भारत में उपचारित अपशिष्ट जल का गैर-पेय जल उद्देश्यों के लिए पुनः उपयोग हो, तो वर्तमान कीमत पर 2050 में इसका बाजार मूल्य 1.9 अरब रुपये होगा।
भारत में करीब 10 राज्यों में अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की नीतियां नेशनल फ्रेमवर्क आने के पहले से बनी हुई थीं। इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। लेकिन ये नीतियां अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग बढ़ाने के लिहाज से व्यापक नहीं हैं। वहीं, हालिया नेशनल फ्रेमवर्क राज्यों को सिर्फ व्यापक दिशा-निर्देश देता है। ऐसे में घरेलू अपशिष्ट जल के ट्रीटमेंट और पुनः उपयोग बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रचलित व्यवस्थाओं पर गौर करना जरूरी है। इसके लिए यूरोपीय संघ में स्पेन, इस्राइल और सिंगापुर जैसे देशों के उदाहरण देखे जा सकते हैं, जो अपने 86 से 100 फीसदी अपशिष्ट जल का ट्रीटमेंट करते हैं। इसके आधार पर भारत में अपशिष्ट जल के उपचार व पुनः उपयोग के लिए ये उपाय कारगर साबित हो सकते हैं :
सोच में व्यापक बदलाव हो : भारत को अपनी सभी जल प्रबंधन नीतियों, योजनाओं और रेगुलेशन में अपशिष्ट जल को जल संसाधनों के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देने की जरूरत है। इस्राइल, सिंगापुर और स्पेन के अनुभव बताते हैं कि कि इस दृष्टिकोण से जल संकट से जूझने वाले देश को जल प्रबंधन में अग्रणी देश बनाया जा सकता है।
जल गुणवत्ता मानक परिभाषित हों : जोखिम घटाने के नजरिये के साथ भारत को अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से छोड़ने और उनके पुनः उपयोग, दोनों के लिए जल गुणवत्ता मानकों को परिभाषित करने और एक नियमित निगरानी कार्यक्रम लागू करने की जरूरत है। यूरोपीय संघ इसका उदाहरण है। वहां पर जल गुणवत्ता मानकों के नियमित मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों में पुनः उपयोग की निगरानी के लिए प्रत्येक छह महीने पर अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग पर एक कार्य समूह की बैठक होती है।
सक्षम संस्थागत तंत्र बनाएं : भारत में शहरी स्थानीय निकायों को अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की दीर्घकालिक योजनाएं बनाने और अपनाने के लिए सशक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करना जरूरी है। इसके अलावा, कार्यान्वयन में अंतिम उपयोगकर्ता समूहों को भी शामिल करना चाहिए, जैसा इस्राइल में है। यहां पर अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को मुख्यधारा में लाने में किसान संघों ने प्रमुख भूमिका निभाई है। वे उपचारित अपशिष्ट जल को पुनः उपयोग के स्थान तक पहुंचाने के लिए जरूरी निवेश में मदद करते हैं और इससे सिंचाई के लिए पानी की 50 प्रतिशत मांग पूरी करते हैं।
वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार हो : भारतीय राज्यों को वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालकों के लिए एक प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और अंतिम उपयोगकर्ताओं की विभिन्न श्रेणियों व उनकी भुगतान क्षमताओं व उपचारित अपशिष्ट जल के लिए बाजार क्षमता के आधार पर एक प्रभावी मूल्य निर्धारण तंत्र बनाना चाहिए। ये सभी कदम भारत में उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग बढ़ाकर इसे एक महत्वपूर्ण संसाधन में बदलने में योगदान दे सकते हैं।
-लेखक काउंसिल ऑन एनर्जी, इनवायरनमेंट ऐंड वॉटर से जुड़े हैं।