गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे निश्चित रूप से राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य को प्रभावित करने वाले हैं। अब इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मोदी की यह जीत विकास के उनके मॉडल पर एक तरह से मुहर है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा विधानसभा चुनाव के लिए गुजरात में 15 फीसदी नए मतदाता जुड़े। जाहिर है, वे युवा हैं और मोदी की जीत में उनकी सबसे अहम भूमिका रही है।
दरअसल, देश की विकास दर में गिरावट की मुख्य वजह विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में आ रही गिरावट है। पर इस मामले में गुजरात देश के बाकी हिस्सों से अलग है। विनिर्माण क्षेत्र के विकास से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। देश के बाकी हिस्सों के विपरीत रोजगार होने के चलते गुजरात में लोगों पर महंगाई का असर कम पड़ा।
हरियाणा के मानेसर में मारुति का संयंत्र बंद हुआ, तो मोदी उसे गुजरात ले गए। इसी तरह पश्चिम बंगाल के सिंगुर में टाटा का संयंत्र नहीं लग पाया, तो मोदी उसे भी अपने यहां खींच ले गए। इन कदमों ने विकास पुरुष की उनकी छवि को मजबूत किया है। कच्छ स्थित सीमेंट संयंत्रों और राज्य के कपड़ा उद्योग में न सिर्फ गुजराती, बल्कि दक्षिण भारत के कई राज्यों के तटीय इलाकों से गए लोगों को रोजगार मिला है।
इस जीत से पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद की उनकी दावेदारी मजबूत हुई है, लेकिन 11, अशोक रोड यानी भाजपा कार्यालय से 7 रेसकोर्स रोड यानी प्रधानमंत्री निवास तक के सफर के लिए बाधाएं कम नहीं हैं। भाजपा के अंदर कई नेता मजबूत दावेदार हैं। ऐसे में उनकी पहली चुनौती पार्टी के भीतर स्वीकार्यता की है।
संभव है कि भाजपा उनकी विवेकानंद यात्रा को देश भर में ले जाने को हरी झंडी दे। पर इतना तो तय है कि इस जीत के बाद उनकी चुनौतियां और बढ़ी हैं। हो सकता है कि वह अटल बिहारी वाजपेयी के उदारवादी मॉडल पर ही आगे बढ़ें। अगले साल फरवरी या मार्च में भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। अरुण जेटली को इस पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बाद मोदी और जेटली की अगुआई में भाजपा लोकसभा चुनाव की रणनीति में जुट सकती है।