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पीके देखने का पक्का इरादा

Mon, 12 Jan 2015 07:06 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
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साधो, कई रोज पहले उन्होंने पीके देखने का पक्का इरादा बनाया, पर वह कामयाब होता नहीं दिखाई दे रहा। शाम ढलते ही वह पीके चलते हैं, मगर थोड़ी देर में टुन्न होते ही पीके छूट जाती है। जिस काम को पूरा करने की बात वह मन में ठान लेते हैं, उसे करने में पीके चूक जाते हैं। वह पीके पर हुए विवाद से नहीं डरते और पीके देखकर ही मानेंगे। ऐसा वह कई बार पीके बोले। पत्नी कहने लगीं, तुम कभी पीके कोई काम कर पाए हो? अगर तुम सिनेमा हॉल तक चले गए, तो भी पीके नहीं देख पाओगे। पीके तो तुम्हारी आंखें ही नहीं खुलतीं, देखोगे भला क्या? वह पत्नी को समझाते हैं कि होश-ओ-हवास में भले किसी को न देख पाएं, पर पीके वह अच्छे-अच्छों को देखने की जुर्रत रखते हैं। वह खुद भी जानते हैं कि पीके पता नहीं, उनके भीतर कहां से ताकत आ जाती है।
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एक बार उन्होंने पीके दारोगा से बदतमीजी कर दी थी। दारोगा हवालात में बंद करने ले चला, तो मुहल्ले वालों ने कहा, छोड़िए सर। यह पीके बहक जाता है। खासकर इसे पीके खाकी वर्दी दिखाई नहीं पड़ती। दारोगा ने पीके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के टैक्स फ्री की तर्ज पर रहम किया। विवादिये अखिलेश से नाराज हैं। कहते हैं, यह जले पर नमक छिड़कना है और वे अगले चुनाव में देख लेंगे।

समझ में नहीं आता कि पीके देखने में लोग बाधा क्यों डाल रहे हैं। इनमें से कई को मैंने खुद भी पीके देखते देखा है। सुना है, पीके करोड़ों की कमाई कर चुकी है। ऐसे में अब अगर पीके उतरने भी लगे, तो क्या हर्ज है। हिरानी और आमिर खान का पीके ने भला कर दिया। वैसे हर आदमी को पीके भलाई ही सूझती है। नॉर्मल रहते ही उसके भीतर दसियों बुराइयां जन्म लेने लगती हैं। एक शराब व्यवसायी पीके की शोहरत से इस कदर मस्त हुए कि उन्होंने शराब की अपनी दुकान का नाम ही पीके रख लिया। ठेके के पड़ोस में जो चाट, नमकीन की दुकानें हैं, वे भी अब पीके समोसा, पीके चाट भंडार और पीके नमकीन बेचने का इरादा करने लगे हैं। भला हो पीके का !
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