पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की पहचान पूछकर हत्या कर दी गई थी, की तरह ताजा हमले की जिम्मेदारी भी पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के मुखौटा समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी आतंकी समूहों के इरादे वही पुराने हैं- कश्मीर में भय का वातावरण बनाना, विकास की प्रक्रिया को बाधित करना और देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच अविश्वास पैदा करना।
पिछले छह वर्षों में टारगेट किलिंग की ऐसी वारदातों में जिन छियालीस लोगों की जानें गई हैं, उससे आतंकियों की मंशा का पता चलता है। वे जानते हैं कि निर्दोष लोगों की हत्या से भय का प्रभाव अधिक व्यापक होता है और उसकी अंतरराष्ट्रीय चर्चा भी होती है। आतंकियों की रणनीति भी यही होती है कि कम संसाधनों में अधिकतम दहशत पैदा की जाए। इन सभी घटनाओं को पाकिस्तान की व्यापक रणनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और सीमा पार आतंकी ढांचे पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के अलावा भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ अपनाई गई कठोर नीति के बीच पाकिस्तान लगातार ऐसे प्रॉक्सी संगठनों का सहारा लेता रहा है, जो उसकी बढ़ती हताशा को दर्शाता है। टीआरएफ जैसे नामों का उपयोग ही पाकिस्तानी आतंकी फैक्टरी ने इसलिए किया, ताकि आतंकवाद को स्थानीय असंतोष का रूप देकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित किया जा सके। जबकि, हकीकत यह है कि इन संगठनों के प्रशिक्षण, हथियार, पैसा और वैचारिक समर्थन की डोर आज भी सीमा पार से ही संचालित होती है।
यह भी गौरतलब है कि जब-जब पाकिस्तान आंतरिक संकटों से घिरता है या पीओके से जुड़े प्रश्न अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आने लगते हैं, तब-तब सीमा पार से आतंकी गतिविधियों में भी तेजी देखी जाती है। दरअसल, आतंकवाद पाकिस्तान के लिए सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक व कूटनीतिक उपकरण रहा है।
ऐसे में इन आतंकी हमलों पर प्रतिक्रिया देने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस पूरी संरचना को कमजोर किया जाए, जिसके बल पर आतंकी संगठन सक्रिय बने रहते हैं। इसके लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष पाकिस्तान का असल चेहरा सामने लाने की कोशिशें करते रहना होगा। इसके अतिरिक्त, भारत को अपने सुरक्षा तंत्र को और अधिक सक्षम बनाना होगा, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में विकास, लोकतंत्र और सामाजिक समरसता की प्रक्रिया को बिना रुके आगे बढ़ाते रहना होगा और यही आतंकवाद का सबसे प्रभावी उत्तर भी होगा।