पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता संभाले एक साल पूरे हो गए हैं और उनका रिपोर्ट कार्ड मिला-जुला है। मेरे लिए उनकी कुछ सबसे सफल उपलब्धियां विदेश नीति और घरेलू मुद्दों से संबंधित हैं।
लेकिन आप इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते कि एक वर्ष पूरा होने पर देश राजनीतिक रूप से ज्यादा ध्रुवीकृत और अस्थिर है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कटौती की वजह से लोकतांत्रिक जगह सिकुड़ गई है। इमरान खान सुरक्षा प्रतिष्ठान और खुफिया एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भर हैं।
शुरू में उन्होंने पूरे देश में उन गरीबों के लिए पनाहगाह स्थापित की, जिन्हें रहने के लिए घर नहीं हैं और जो सड़कों पर सोते हैं। उन्हें बिस्तर और सुबह काम पर निकलने से पहले नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है। इनमें सभी बेघरों को समायोजित नहीं किया जा सका है, लेकिन इससे भी लोगों को मदद मिली है।
उन्होंने अगला कदम बेघरों को कम लागत पर घर उपलब्ध कराने के लिए उठाया है, हालांकि इसके लिए अभी योजना ही बन रही है और इसका खर्च सरकार ही उठाएगी, जो अभी भारी आर्थिक संकट में है।
अपने अल्पसंख्यक नागरिकों के साथ पाकिस्तान का रवैया हमेशा चिंताजनक रहा है और हर सरकार को लेकर यह शिकायत रही है। लेकिन हाल में राष्ट्रपति निवास में अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष आयोजन हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति, दोनों की मौजूदगी असाधारण थी।
नेशनल एसेंबली में मानवाधिकार के संसदीय सचिव लाल चंद माल्ही ने हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए आयोजन में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर संतोष जताते हुए कहा कि यह कायदे-आजम के दृष्टिकोण का पाकिस्तान बनाने के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।