मुझे भी मोबाइल चाहिए...। पत्नी ने ‘हमारी मांगें पूरी करो’ वाले अंदाज में कहा, तो मैं सिर से पैर तक झनझना गया, जैसे साइलेंस मोड पर मोबाइल। हमारे संबंध कई बरसों से कॉर्डियल रहे हैं, और ऐसा मैंने कुछ नहीं किया कि उसे मोबाइल की डिमांड करनी पड़ जाए।
मैं उसके किसी काम में आड़े नहीं आता। वह समाज-सुधारक टीवी सीरियल देख सके, इसके लिए मैं देर रात तक यहां-वहां टोले खाता रहता हूं। मुझे व्हिस्की पसंद है, मगर सिर्फ उसके लिए ‘जिन’ पीता हूं, ताकि उसे गंध न आए। पूरी तनख्वाह उसे देता हूं और ऊपरी कमाई से जुआ खेलता हूं। बाहर के रागात्मक संबंध घर नहीं ले जाता हूं...और क्या करूं...क्या मरूं?
अपनी तरफ से मैं आदर्श पति बने रहने की पूरी कोशिश करता हूं, भले ही उसके लिए कितना ही छल-कपट क्यों न करना पड़े या झूठ ही क्यों न बोलना पड़े। हर गलत काम मैं इतनी सफाई से करता रहा हूं कि कई बार तो मुझे भी यकीन नहीं हो पाता है कि यह सब मेरा ही किया-धरा है।
फिर आखिर ऐसा क्या हो गया कि आज वह मोबाइल मांगने लगी। मुझे तो ऐसे लगा, जैसे बरसों की तपस्या भंग हो गई हो। लैंडलाइन का बिल मैंने कभी नहीं देखा। अपनी जेब में दो-दो मोबाइल का वजन और जिम्मेदारी उठाना मंजूर किया, लेकिन उसके लैंडलाइन को कभी हाथ नहीं लगाया। यहां तक कि बाहर से घर फोन करना भी हुआ, तो घर आ गया, लेकिन उसके लैंड-लाइन को डिस्टर्ब नहीं किया।
मेरे इतने समर्पण, त्याग और बलिदान का यह नतीजा है कि वह आज मुझसे मोबाइल मांग रही है।
मुझसे क्या गलती हो गई कि तुम मोबाइल मांग रही हो...? पत्नी से मैं जानना चाह रहा था।
मोबाइल मांग रही हूं...तुम तो ऐसे कर रहे हो, जैसे तलाक मांग रही हूं। पत्नी ने कहा।
मोबाइल मांगने का मतलब ही तलाक हो जाना है। तुमने पढ़ा नहीं...पंजाब राज्य महिला आयोग ने कहा है कि मोबाइल की वजह से महिलाओं के वैवाहिक जीवन में तलाक आ रहे हैं, रिश्ते टूट रहे हैं। महिलाओं को चाहिए कि वे मोबाइल से दूर रहें।
और पुरुषों को...वे चाहें, तो मोबाइल भी दो रखें और पत्नी भी! है न! मुझे कल तक मोबाइल मिल जाना चाहिए, वरना...तुम्हारे पास दो मोबाइल जरूर रह जाएंगे, पर पत्नी एक भी नहीं रहेगी...समझे।’’ पत्नी ने कहा, तो मैंने जेब से एक मोबाइल निकाल कर उसे पकड़ा दिया।