मैं दिल्ली वाली हूं, सो मुझे यह कहने का अधिकार है कि जितनी किरकिरी अरविंद केजरीवाल सरकार की हुई है, उतनी शायद ही दिल्ली में किसी सरकार की हुई हो। दिल्ली वाले आम आदमी पार्टी के तमाशे से, उसके झूठे वायदों से तंग आ चुके हैं। दिल्ली में शानदार जीत हासिल करने के बाद अरविंद केजरीवाल शुरू से साबित करने में लग गए कि उनको दिल्ली वालों की सेवा में कम रुचि थी और अपनी सेवा में ज्यादा। दिल्ली उनके लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी, सो मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने प्रधानमंत्री पर हमले शुरू किए। कभी उन पर दिल्ली सरकार के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया, तो कभी उनको पागल कहा। वित्त मंत्री पर भी उन्होंने हमले किए, और जब वित्त मंत्री ने उन पर मानहानि का मुकदमा ठोका, तो केजरीवाल साहब ने दिल्ली सरकार के पैसों से ऐसे वकील नियुक्त किए, जिनकी फीस करोड़ों में थी।
इन हरकतों ने दिल्ली सरकार को सुर्खियों में रखा। जनता के पैसों से केजरीवाल ने टीवी और रेडियो पर अपना निजी प्रचार शुरू किया। पंजाब और गोवा के चुनाव पास आए, तो समझ में आया कि क्यों उनको इतना प्रचार करने की जरूरत थी। चुनाव अभियान शुरू होते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली में कम और पंजाब में ज्यादा दिखने लगे। राजनीतिक गलियारों में खबर गर्म रही कि आप पंजाब की चुनावी दौड़ में सबसे आगे है।
जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का कदम उठाया, तो सबसे ज्यादा हल्ला दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से सुनाई दिया। केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ नोटबंदी के खिलाफ दिल्ली में जलसे किए। केजरीवाल ने यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने गरीबों का पैसा लूटकर अपने अमीर दोस्तों को देने के लिए ही नोटबंदी का फैसला किया है। दोनों ने रिजर्व बैक के सामने धरना भी दिया, और तब जाकर चुप हुए, जब उन्होंने पाया कि देश की जनता, खासकर गरीब लोग नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं।
अब जब दिल्ली वालों ने नगर निगम के चुनाव में भाजपा को जिताया है, तब केजरीवाल ने कहा कि यह मोदी लहर नहीं, ईवीएम लहर है। इसको साबित करने के लिए केजरीवाल साहब ने टीवी पर अपने साथी यह कहने के लिए भेजे कि वह साबित कर सकते हैं कि किस तरह ईवीएम मशीनों में गड़बड़ की जा सकती है। सवाल यह है कि 2015 के चुनाव में दिल्ली वालों ने जब आप को दिल्ली विधानसभा की तकरीबन सारी सीटें दे दी थीं, क्या उस समय भी ईवीएम मशीनें गड़बड़ थीं। अगर भाजपा के लोग ईवीएम मशीनों में गड़बड़ करने में इतने ही माहिर हैं, तो पंजाब में वह क्यों हारी?
केजरीवाल साहब, इन बेकार की बातें छोड़कर जरा शांति से सोचिए कि दिल्ली के लोग आपसे इतनी जल्दी क्यों नाराज हो गए हैं। आप सोचने बैठेंगे, तो शायद आपको पता चलेगा कि दिल्ली वाले आपसे इसलिए नाराज हैं, क्योंकि आपने पिछले दो वर्षों में इस महानगर के लिए कुछ नहीं किया है। इस शहर की एक भी समस्या का समाधान आप नहीं कर पाए हैं। कहते हैं कि आपके दौर में मोहल्ला क्लीनिकों के जरिये स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुईं हैं। लेकिन हमने यह भी सुना है कि इनके बहाने आपने अपने दोस्तों और कार्यकर्ताओं को ज्यादा और दिल्ली वालों को कम लाभ पहुंचाया है। निजी तौर पर मैं आपसे सिर्फ यह गुजारिश करना चाहती हूं कि कभी हमारी गली में भी आएं और अपनी आंखों से देखें कि हमारा इलाका कितना बेहाल, कितना गंदा है।