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एस्टोनिया से सीखे दिल्ली

Tue, 26 May 2015 08:02 PM IST
मुनीश रायजादा
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फिनलैंड की सीमा पर बसे एक छोटे से यूरोपीय देश एस्टोनिया का नाम बहुतों ने नहीं सुना होगा, क्योंकि मात्र 13 लाख की आबादी वाला यह मुल्क वैश्विक विवादों से दूर रहा है। लेकिन ई-गवर्नेंस की दिशा में इसका काम केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के लिए अनुकरणीय हो सकता है। वर्ष 1991 में साम्यवादी रूस से आजाद होने वाला एस्टोनिया आज विकसित देशों की श्रेणी में तो शामिल है ही, दुनिया के सर्वाधिक वायर्ड (इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला) देशों में भी यह गिना जाता है। 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने एस्टोनिया के ई-गवर्नेंस प्रारूप को दशक का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना।
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वर्ष 2001 से वहां की सरकार ने देश भर में डिजिटल केबल नेटवर्क का जाल बिछाने का बीड़ा उठाया। इसका उद्देश्य आम लोगों, विभिन्न निजी संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी तरीके से सूचना का आदान-प्रदान सुनिश्चित कराना था। यह नेटवर्क आसान व तेज आयकर रिटर्न फाइलिंग एवं चुनावों के दौरान वैकल्पिक ई-वोटिंग जैसी अन्य प्रभावशाली सुविधाएं भी प्रदान करता है। ई-गवर्नेंस का यह प्रारूप इतना विकसित है कि नागरिक अपने सभी सरकारी कामकाज ऑनलाइन कर सकते हैं। हर नागरिक को एक निजी आई डी कोड दिया जाता है, जिसे वह रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल कर सकता है। इसी प्रकार ‘डिजिटल सिग्नेचर ऐक्ट 2000’ ने ई- ट्रांजेक्शन (लेन देन) व ई- डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया है। वहां की लगभग 99 फीसदी कंपनियां सरकार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट इस नेटवर्क के माध्यम से प्रदान करती है।

यह सारा डाटा एक केंद्रीय डाटाबेस में एकत्र होता है, जहां से विभिन्न सरकारी विभाग अपनी आवश्यकतानुसार इसका उपयोग कर सकते हैं। इससे न केवल लागत व समय की बचत होती है, बल्कि यह प्रभावी रूप से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में भी सफल रही है।
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दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार, जिसने अपने 100 दिन पूरे कर लिए हैं, अपने ई-गवर्नेंस के वायदे को पूरा करने के लिए एस्टोनिया मॉडल को अपना सकती है। व्यापारियों की सुविधा हेतु वैट व अन्य टैक्सों की प्रक्रिया का सरलीकरण, जनता को मुफ्त वाई-फाई, सरकारी विभागों की दक्षता बढ़ाना और दिल्ली को एक विश्व स्तरीय शहर बनाना, आदि आप के चुनावी घोषणापत्र के प्रमुख वायदे हैं। ये सभी परियोजनाएं एस्टोनियिन मॉडल से पूरी की जा सकती हैं। इससे जहां जनता को सुविधाएं मिलेंगी, वहीं लालफीताशाही पर लगाम लगेगी और प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। बेशक अभी दिल्ली में एस्टोनिया के बरक्स डिजिटल साक्षरता कम है, लेकिन दिल्ली जैसे शहर में इस क्षेत्र में सफलता पाना मुश्किल नहीं है।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी अपने चंदे का रिकॉर्ड इंटरनेट पर सार्वजनिक करती है। हाल ही में आप सरकार ने दिल्ली के सभी भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने की सुविधा जनता को प्रदान की है। दिल्ली सरकार अगर पूरी दिल्ली में मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध कराती है, तो लोगों को टैक्स भरने और वित्तीय लेन-देन के लिए विभिन्न दफ्तरों और बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दिल्ली को दुनिया के शीर्ष पांच शहरों में लाने के लिए दिल्ली सरकार को ई-गवर्नेंस की दिशा में कदम बढ़ाना ही होगा।
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-लेखक शिकागो स्थित स्तंभकार हैं और आप से जुड़े हैं
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