छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली रेखा गुप्ता दिल्ली भाजपा की महासचिव व महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और दक्षिण दिल्ली नगर निगम की मेयर भी रह चुकी हैं। उन्हें एक कुशल प्रशासक और बेहद सक्रिय नेता के रूप में जाना जाता है। अरविंद केजरीवाल की तरह हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली रेखा गुप्ता का अनुभव, संघ से जुड़ाव और जमीनी मुद्दों की समझ उन्हें इस पद का उपयुक्त उम्मीदवार भी बनाती है। उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर वैश्य समुदाय व महिला वर्ग को साधने की कोशिश तो की ही गई है, इसके जरिये 21 राज्यों की सत्ता में शामिल भाजपा को पहला महिला मुख्यमंत्री चेहरा भी मिला है।
रेखा गुप्ता ऐसे वक्त में मुख्यमंत्री बनी हैं, जब दिल्ली यमुना की सफाई, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, ट्रैफिक जाम, अवैध कॉलोनियों इत्यादि तमाम समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में, इन समस्याओं के समाधान के अलावा रोजगार के नए अवसर पैदा करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। ऊपर से, दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मद्देनजर विपक्ष के साथ संतुलन बिठाते हुए शासन चलाने की चुनौती भी होगी। करीब ढाई दशक बाद दिल्ली में भाजपा की वापसी हो रही है, तो जनता की बढ़ी हुई अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी उनके लिए कोई कम बड़ी चुनौती नहीं होगी।
बतौर महिला मुख्यमंत्री, उनसे यह उम्मीद रहेगी कि वे महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने और सुरक्षित माहौल बनाने पर भी खास ध्यान देंगी। नई मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल दिल्ली को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन यह तय है कि उनकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वे जनता के साथ कितनी निकटता से जुड़ती हैं और उनके मुद्दों का समाधान कितने प्रभावी ढंग से करती हैं। दिल्ली को लोक-लुभावन नहीं, बल्कि ठोस नीतियों व कार्यों की जरूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि रेखा गुप्ता राजधानी को विकास की वह दिशा देंगी, जिसके लिए उसने लंबा इंतजार किया है।