आज सच में मेरी गुरु अप्पा जी (पद्म विभूषण गिरिजा देवी) के सिखाए कबीर भजन की वो पंक्तियां मुझे बार-बार याद आ रही हैं- चार जने मिल खाट उठाई ,चहुं दिस भम भम उठल हो कौन ठगवा नगरिया लूटल हो... जिंदगी से हम सबसे ज्यादा सीख तब लेते हैं, जब किसी बुरे वक्त से गुजरते हैं।
बुरे वक्त में ही हमें जिंदगी, रिश्तों और अपनों की कीमत पता चलती है। अच्छे वक्त में हम सिर्फ अच्छाइयों में ही खोए रहते हैं, जिंदगी के कठिन पहलुओं पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है। इसीलिए कहते हैं कि जिंदगी के दो पहलू होते हैं और इंसान को अपनी जिंदगी में हर पहलू का सामना करना पड़ता है।
दुनिया के अधिकांश देशों में लोग घरों में बंद हैं। हमेशा चलते रहने वाले पैरों में वक्त ने जैसे बेड़ियां डाल दी हैं। लोग परेशान हैं, क्योंकि गति जीवन का हिस्सा है। सवाल जिंदगी का है, इसलिए बाहरी गति पर आफत टलने तक विराम लगा है। ये कैसी मजबूरी है? याद आवत जब पिया की बतियां उर वीच उठत दहनवा हो रामा... यह दहन कब बुझेगी, किसी को पता नहीं।
लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी कई अच्छी चीजें हो रही हैं, जो हालात ठीक होने के बाद हमको एक नई रोशनी देंगी। मसलन, अपनों का साथ। घर पर रहने की मजबूरी रिश्तों को करीब लेकर आ रही है। घर के काम भी उतने ही जरूरी और उन्हें करने वाले उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं, यह परिवार में पूरा वक्त देने के बाद अब हर कोई समझ पा रहा है। जो चीज आम तौर पर मिलना हमारे लिए स्वप्न जैसा है, वही हमारी आंखों के सामने हकीकत में बदल रही है।
आजकल लोग इंटरनेट के जरिये रिश्ते बनाने में ज्यादा भरोसा रखते हैं, प्रकृति ने उन्हें फिर से अपने रिश्तों को संवारने का मौका दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी संकटमय परिस्थितियों में यह एक वरदान नहीं तो क्या है? इसके अलावा लॉकडाउन ने लोगों को अपना हुनर पहचानने और उसे निखारने का भी मौका दिया है। आपने इससे पहले अधिकांश लोगों को यह कहते जरूर सुना होगा कि अपने काम के अलावा कुछ भी करने के लिए वक्त नहीं है।
मैं एक संगीतकार हूं। इसलिए हमें भी संगीत को लेकर सोचने या उसको और खूबसूरत बनाने में अपनी सृजनशीलता का अवसर मिलना बहुत जरूरी होता है। अब हमें इन सब चीजों पर ध्यान देने का बड़ा मौका मिला है। मैं इस वक्त अपने शागिर्दों को ऑनलाइन संगीत का प्रशिक्षण दे रही हूं। बिगड़े वक्त में सही दिशा की ओर चलने और टूटकर नहीं बिखरने के लिए यह इंसानी दिमाग की परख का समय है।
वैसे लॉकडाउन का पर्यावरण पर भी अच्छा असर पड़ा है। सड़कों पर अत्यधिक गाड़ियों के दौड़ने से उत्सर्जित, कचरे के ढेर से उत्पन्न और ध्वनि प्रदूषण से तो जैसे प्रकृति को अचानक छुटकारा मिल गया है। वर्तमान हालात कई रूपों में लोगों को मानसिक रूप से अस्थिर कर रहे हैं, जिनसे छुटकारा पाने के लिए नियमित योगाभ्यास करना भी काफी सुकून देने वाला हो सकता है।
मैं आशावादी हूं और मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द हमारे ऊपर से इन काले बादलों का साया छंट जाएगा और प्रकृति से हमें एक बेहतर, सुलझी हुई और प्रदूषणमुक्त धरती तोहफे में मिलेगी। (लेखिका मशहूर शास्त्रीय गायिका हैं।)