चीन ने अगर कोरोना वायरस के फैलते ही, यानी दिसंबर, 2019 के प्रारंभ में ही, जरूरी एहतियाती कदम उठाए होते और दुनिया को भी बता दिया होता, तो 95 फीसदी नुकसान रोका जा सकता था। दुनिया भर में मारे जाने वाले हर सौ में से 95 लोगों की जान बचाई जा सकती थी, संक्रमित होने वाले 95 फीसदी लोग सेहतमंद बने रह सकते थे।
पूरी दुनिया में लॉकडाउन रोके जा सकते थे, आज घरों में कैद होकर भूखे मरने के लिए मजबूर असंख्य गरीब तथा बुजुर्ग लोगों को इस स्थिति से बचाया जा सकता था, विश्व अर्थव्यवस्था को तबाह होने से रोका जा सकता था तथा शेयर बाजार में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट के कारण कंगाल हो जाने वाले निवेशकों को सुरक्षित रखा जा सकता था।
लेकिन चीन में कम्युनिस्ट सरकार है, जो लोकतांत्रिक देशों की सरकारों की तरह पारदर्शी नहीं है। पूरी दुनिया को घुटनों के बल टिका देने और अरबों लोगों की जिंदगी खतरे में डाल देने वाला चीन यह कहकर खुद को नायक के रूप में पेश कर रहा है कि उसने तो अपने यहां पर हालात काबू कर लिए हैं।
यह बात अलग है कि दुनिया चीन को दोषी की तरह देख रही है। कोरोना वायरस का पहला मरीज 10 दिसंबर को वुहान में सामने आया था। इसके एक महीने पहले यानी नवंबर में ही कुछ लोगों को वायरस का संक्रमण होने की दबी-छिपी बातें आने लगी थीं। चीन की पहली गलती यह है कि यह खबर उसने जोर-शोर के साथ दबा दी।
अगर यही बात भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में होती, तो खबर दबती नहीं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुत सारे दूसरे माध्यमों से दुनिया भर में फैल चुकी होती। ऐसे वायरसों के खतरनाक वैश्विक इतिहास को देखते हुए भारत सरकार भी इसके बारे में दूसरी सरकारों को जानकारी दे चुकी होती।
हम पर विदेशी दबाव भी पड़ चुका होता। पर चीन ने ऐसा नहीं किया। चीन की सरकार ने पहले तो वायरस फैलने की बात का यकीन ही नहीं किया और जब उसे यकीन हो भी गया, तो उसका सारा जोर इसे छिपा देने पर था। जिन वैज्ञानिकों ने वायरस का पता लगाया, उनको चुप करा दिया गया। उनके पास वायरसों के जो सैंपल थे, उनको भी नष्ट करने के लिए मजबूर कर दिया गया।
तीन जनवरी को चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने वुहान की प्रयोगशालाओं को निर्देश दिया कि वे तमाम सैंपल नष्ट कर दें और इस बारे में फिर कभी चर्चा भी न करें। डॉ. ली वेनलियांग और आइ फेन ने इस बारे में सोशल मीडिया पर जनता को सतर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया और कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी गई।