अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस की वजह से दुनिया इतिहास की सबसे बड़ी मंदी की ओर आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है। यह मंदी वर्ष 2008 की वैश्विक मंदी से कई गुना खतरनाक है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने अपनी ट्रेड रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया आर्थिक महामंदी की ओर आगे बढ़ रही है, जिससे दुनिया के अधिकांश विकासशील देश बेहद मुश्किलों में आ जाएंगे, लेकिन कोरोना का चीन और भारत पर तुलनात्मक रूप से बहुत कम असर होगा। दुनिया के कुछ और आर्थिक संगठनों ने भी अपनी रिपोर्ट में कमोबेश यही बातें कही हैं।
दरअसल भारत में कोरोना से निपटने के लिए पिछले कुछ समय से उपयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। इस कारण अपने यहां कोरोना का आर्थिक असर अमेरिका और यूरोप की तुलना में कम है। इसके अलावा भारत की अर्थव्यवस्था कमोबेश आत्मनिर्भर है और वैश्विक व्यापार पर भारत की निर्भरता भी कम है। इसी कारण लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पटरी पर लौटने की संभावना अधिक बताई जा रही है। कोरोना संकट और लॉकडाउन की चुनौतियों के बीच देश में पांच महत्वपूर्ण आर्थिक अनुकूलताएं उभरती दिखाई दे रही हैं, जो न केवल देश की गिरती अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती हैं, बल्कि करोड़ों लोगों को जीवन-यापन में अधिक मुश्किलों से भी बचा सकती हैं।