चीन में कोरोना वायरस के पहले पॉजिटिव मामले की शिनाख्त 30 दिसंबर, 2019 को हुई थी। वायरस के पूरे वुहान शहर में फैलने, और उसके बाद हुबेई प्रांत में फैलने और फिर चीन के अन्य प्रांतों तथा दूसरे देशों में फैलने के साथ ही पूरी दुनिया में भय व्याप्त हो गया। 27 जनवरी, 2020 तक 27 देश से इससे प्रभावित हो चुके थे।
12 फरवरी, 2020 को राहुल गांधी ने ट्वीट किया
'कोरोना वायरस हमारे लोगों और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर चेतावनी है। मेरी समझ से सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। समय पर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।'
12 फरवरी तक केंद्र सरकार ने सिर्फ दो महत्वपूर्ण कदम उठाए
1. 17 जनवरी को कुछ निश्चित देशों की यात्रा न करने के संबंध में पहला सुझाव जारी किया गया और 2. तीन फरवरी, को कुछ निश्चित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए जारी किए गए ई-वीजा निलंबित किए गए।
श्री गांधी सही थे
जैसा कि उम्मीद थी, ट्रोल सक्रिय हो गए। किन्हीं सरल पटेल ने लिखा, 'ओ होशियार। क्या तुमने ताजा खबर चेक की।' किसी पूजा ने लिखा, 'हे भगवान, आपमें समझ भी है। मजाक करना बंद करो और जाकर फिर से पोगो देखो...। ' मैं हैरत में हूं कि सरल पटेल और सुश्री पूजा कहां छिप गए हैं। तीन मार्च को श्री गांधी ने ट्वीट किया और इस संकट से निपटने के लिए मजबूत संसाधनों के साथ कार्य योजना पेश करने की मांग की।
केंद्र सरकार ने 14 मार्च से कार्रवाई करना शुरू किया और कुछ निश्चित देशों से आने वाले यात्रियों को क्वारंटीन किया गया, पड़ोसी देशों की सीमाएं बंद कर दी गईं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बदलाव किए गए, घरेलू उड़ानों पर रोक लगा दी गई और अंत में 25 मार्च से प्रभावी होने वाले लॉकडाउन की घोषणा की गई। पीछे मुड़कर देखें, तो श्री गांधी सही थे; वह उन पहले लोगों में थे, जिन्होंने गंभीर संकट की चेतावनी दी थी।
कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से पहले पहल की और राज्यों में अपने स्तर पर लॉकडाउन का एलान किया। कोविड-19 से जंग जीतने के बाद भी यह बहस लंबे समय तक जारी रहेगी कि क्या केंद्र सरकार को मार्च के बजाय फरवरी में ही कड़े कदम उठाने चाहिए थे।
इस स्तंभ का उद्देश्य अतीत को कोसना नहीं है, बल्कि सरकार को साहसिक कदम उठाने के लिए उकसाना है, ताकि भारत वायरस के खिलाफ लड़ाई में, जिंदगियां बचाने में, आजीविकाओं को सुरक्षित रखने के वक्र में आगे रहे और नीचे जाती अर्थव्यवस्था को उबारकर पटरी पर ला सके।