यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों में बीते 27 दिसंबर को कोरोना वायरस से बचाव के टीकाकरण का महाभियान शुरू हो गया है। यूरोपीय संघ के सभी देशों में अरबों डॉलर लगाकर जर्मन कंपनी 'बायोनटेक' और अमेरिकी कंपनी 'फाइजर' निर्मित कोविड-19 वैक्सीन मुफ्त लगाया जा रहा है। हालांकि टीके का विरोध करने वाले भी कम नहीं हैं। जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली और स्पेन में टीके के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन भी हो चुके हैं।
अरबों डॉलर मंहगा यह अभियान न केवल टीके की खोज करने वाली 'बायोनटेक' और टीके का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही 'फाइजर' के लिए 'सोने के अंडे देने वाली मुर्गी' बन गया है, बल्कि उनको भी मालामाल कर रहा है, जिन्होंने इन कंपनियों के शेयरों को सही समय पर खरीदा। टीके के खोजी-वैज्ञानिक, तुर्की मूल के जर्मन प्रोफेसर ऊर शहिन और उनकी डॉक्टर पत्नी औएजलेम तुरेचि का तो भाग्य ही खुल गया।
पर उनसे भी अधिक बांछें खिल गई हैं दो जर्मन जुड़वां भाइयों की। अन्द्रेयास और टोमास श्ट्रुइंगमान नाम के ये दोनों जुड़वां भाई औषधि उद्योग के पुराने दिग्गज हैं। अन्द्रेयास ने डॉक्टरी की पढ़ाई की और टोमास ने औद्योगिक प्रबंधन की। 1980 में दोनों ने 'हेक्साल' नाम की जेनरिक दवाएं बनाने वाली नई कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी को 2005 में दोनों भाइयों ने लगभग पांच अरब यूरो में बेच दिया (आजकल एक यूरो करीब 90 रुपये के बराबर है)।
दोनों चाहते, तो इस पैसे से आजीवन गुलछर्रे उड़ा सकते थे, किंतु इस पैसे को उन्होंने बड़े पैमाने पर मेडिकल जीन-तकनीक के शोधकार्यों में लगाना शुरू कर दिया। यह निर्णय काफी जोखिम भरा था। एक तो जीन-तकनीक जर्मनी में बहुत पसंद नहीं की जाती, फिर उससे जुड़े शोधकार्यों का कोई परिणाम निकलने में बहुत समय लगता है और परिणाम भी नैतिक-व्यावहारिक दृष्टि से कई बार संदेहास्पद होते हैं। पर श्ट्रुइंगमान बंधुओं का दांव चल गया।
लगभग उसी समय कैंसर की रोकथाम के लिए जीन-तकनीकी उपाय खोज रहे प्रो. ऊर शहिन और उनकी पत्नी डॉ. औएजलेम तुरेचि को अपनी पहली कंपनी 'गानीमेड फार्मास्युटिकल्स' में पैसा लगाने वाले निवेशकों की तलाश थी। यह तलाश सितंबर 2007 में उन्हें श्ट्रुइंगमान बंधुओं के पास ले गई। शहिन ने उनसे कहा कि वे कैंसर की एक ऐसी दवा पर काम कर रहे हैं, जो कोशिकाओं में आनुवंशिक संदेशवाही 'मेसेंजर रिबोन्यूक्लिइक ऐसिड' कहलाने वाली जीन-तकनीक पर आधारित है। इसका लक्ष्य है- कैंसर-निरोधक टीका बनाना। श्ट्रुइंगमान बंधु प्रो. शहिन की कंपनी में 15 करोड़ यूरो के निवेश के लिए राजी हो गए।
शहिन-तुरेचि दंपति का कारोबार बढ़ता ही गया। 2008 में उन्होंने फ्रैंकफर्ट के पास माइन्स में 'बायोनटेक' नाम की एक नई शेयर-धारक कंपनी बनाई। उन्होंने अपनी कंपनी 'गानीमेड' को 2016 में, 40 करोड़ यूरो में एक जापानी औषधि निर्माता को बेच दिया। इस पैसे से 'बायोनटेक' में अपना हिस्सा बढ़ाते हुए उसके 17 प्रतिशत शेयर अपने नाम कर लिए। ये शेयर अब पांच अरब डॉलर से अधिक मूल्यवान हैं। समझा जाता है कि कम से कम आधे शेयर उन्हीं श्ट्रुइंगमान बंधुओं के पास हैं, जिन्होंने अपने जोखिम भरे निवेश से एक दशक पहले, शहिन-तुरेचि दंपति के हाथ मजबूत किए थे।
'बायोनटेक' के शेयरों ने दिसंबर 2020 में प्रो. शहिन का नाम संसार के 500 सबसे बड़े धनकुबेरों की सूची में लिखवा दिया। कोविड-19 से बचाव के टीके BNT162b2 को जबसे यूरोप और अमेरिका में औपचारिक अनुमति मिल गई है, तबसे 'बायोनटेक' के शेयरों का भाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वैसे अरबों डॉलर कमाने वाले एक वही नए धनकुबेर नहीं बने हैं, बल्कि उनकी सफलता ने अनेक ऐसे लोगों को भी करोड़पति या अरबपति बना दिया है, जिन्होंने सही समय पर उनकी कंपनी के शेयर खरीदे या उनके टीके के सही तापमान पर भंडारण एवं परिवहन की ठेकेदार कंपनियों के मालिक हैं। शहिन-तुरेचि दंपति की लगन, प्रतिभा, सादगी और धैर्य ने आज न केवल उन्हें दुनिया का एक बहुचर्चित दंपति और धनकुबेर बना दिया है, बल्कि कोरोना जैसी दुर्दांत वैश्विक महामारी से लड़ने का अस्त्रदाता भी सिद्ध कर दिया है। वे जर्मनी की छवि के लिए भी एक अच्छा विज्ञापन बन गए हैं।