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खतरे में सांविधानिक लोकतंत्र

मरिआना बाबर Updated Thu, 19 Jul 2018 06:20 PM IST
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पाकिस्तान में चुनाव

पाकिस्तान में चुनाव एक दुर्लभ घटना है, इसलिए यहां के लोग इसका स्वागत करते हैं, क्योंकि 70 वर्षों के इतिहास में यहां अधिकतर प्रत्यक्ष रूप से सैन्य शासन रहा है। वर्ष 2018 का चुनाव वास्तव में गैर-लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ लोकतंत्र समर्थक ताकतों की लड़ाई है। अगले बुधवार यानी 25 जुलाई को नई सरकार के गठन के लिए नेशनल एसेंबली की 342 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें महिलाओं और जातीय अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 70 विशेष सीटें शामिल हैं। उसी दिन चार प्रांतीय विधानसभाओं-सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तुनख्वा के लिए मतदान कराए जाएंगे। लेकिन पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार दोषसिद्ध अपराधी सुर्खियों में हैं। दोषी नंबर 3,421, तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ और उनकी बेटी दोषी नंबर 3,422, मरियम नवाज रावलपिंडी के अदियाला जेल में बंद हैं। उन दोनों को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया है और वे चुनावी दौड़ से बाहर हो चुके हैं। ये दोनों पाकिस्तान के ऐसे दोषी राजनेता हैं, जो स्वेच्छापूर्वक जेल जाने के लिए मुल्क लौटे हैं। 2018 के चुनाव में दो असाधारण घटनाएं हुई हैं, एक पाकिस्तानी महिला नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज का सुखद उदय और दूसरी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित और बहिष्कृत आतंकवादी समूहों को सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा मुख्यधारा के चुनाव में लाया जाना, जिसका स्वागत नहीं किया जा सकता।


 

44 वर्षीय मरियम को दोषी ठहराकर सात वर्षों के लिए जेल भेज दिया गया है। पाकिस्तान के लोगों ने बेहद दिलचस्पी से एतिहाद एयरवेज की प्रथम श्रेणी के केबिन से मरियम को बाहर निकलते हुए देखा, जिन्होंने महंगे जूते और लाखों रुपये के बैग लिए हुए गंदे जेल की अपनी सेल में कदम रखा, जहां उन्हें फर्श पर गद्दा और गंदा शौचालय मिला। जेल जाने से पहले लंदन छोड़ते हुए उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान लौटना मेरी जिंदगी का सबसे कठिन फैसला है। मेरी मां लंदन में वेंटिलेटर पर है और हमें नहीं मालूम कि आगे क्या होगा। अपनी मां को इस स्थिति में छोड़ने से बड़ा दुख और कुछ नहीं हो सकता, लेकिन राष्ट्रीय कर्तव्य निभाना भी जरूरी है, इसलिए हम यह यात्रा जरूर करेंगे। लेकिन जैसे ही मरियम विमान से निकलकर जेल गईं, वह शांत हो गईं और मीडिया को देखकर मुस्कराने लगीं। उनके डिजाइनर स्लीपर और बैग पर पूरे पाकिस्तान में ऑनलाइन टिप्पणियां की गईं। वह करीब एक लाख रुपये कीमत की सैंडल और उससे भी महंगे हैंडबैग के साथ जेल गईं। यही नहीं, वह लाखों रुपये के गहने और 28 हजार डॉलर की रॉलेक्स घड़ी पहने हुई थीं। सरकार से  अपने जेल सेल को अपग्रेड करने का अनुरोध करने से इन्कार करते हुए वह एक गंदे शौचालय के बगल में जमीन पर सोती हंै और चाहती हैं कि उनके साथ सामान्य कैदी जैसा सुलूक किया जाए।


लेकिन पाकिस्तान के लोगों के लिए गंभीर चिंता की बात सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों को मुख्यधारा की राजनीति में लाना और उनमें से कई के इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी (पीटीआई) को समर्थन की घोषणा करना है। पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में पीटीआई उम्मीदवार असद उमर (जिन्हें पाकिस्तान का भावी वित्त मंत्री माना जाता है, अगर पीटीआई सत्ता में आती है) को इस्लामाबाद स्थित एक मजहबी नेता का समर्थन मिला, जिसे अमेरिका ने आतंकवादियों की सूची में रखा है। मौलाना फजलुर रहमान खलील को अमेरिकी सरकार ने विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादियों की सूची में हरकत उल मुजाहिदीन नामक आतंकवादी संगठन में कथित भूमिका के कारण रखा है, जिसे अतीत में उन्होंने गठित किया था। इमरान खान को इस बात का एहसास नहीं है कि अगर उन्होंने सरकार का गठन किया, तो उन्हें फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का सामना करना पड़ेगा, जो उनकी पार्टी द्वारा आतंकवादियों को शामिल करने और आतंकवाद को धन उपलब्ध कराने के कारण पाकिस्तान को ग्रे या ब्लैक लिस्ट में रख देगा।

 

एक अन्य राजनीतिक पार्टी अहले सुन्नत वल जमात, जो पाकिस्तान की अल्पसंख्यक शिया आबादी के खिलाफ हिंसा और नफरत फैलाती है, और प्रतिबंधित कट्टरपंथी समूह है, वास्तव में लश्कर-ए झंगवी का राजनीतिक मोर्चा और अल कायदा से संबंध रखने वाला एक घातक सांप्रदायिक समूह है। एक सुन्नी मौलवी मोहम्मद अहमद लुधियानवी ने, जो एएसडब्ल्यूजे चलाता है, जब चुनाव में खड़े होने की घोषणा की, तो कथित चौथी सूची (आतंकवादियों की सूची) से उसका नाम हटा दिया गया। हालांकि उनकी पार्टी अब भी पाकिस्तान की राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी प्राधिकरण की निगरानी सूची में है। हाल के वर्षों में सेना ने मुख्यधारा के आतंकवादियों की योजनाओं पर विचार किया और उन्हें हिंसा छोड़कर राजनीति में आने की अनुमति दी-यह कहना है पूर्व सरकार के एक कैबिनेट सदस्य का, जो उस विचार-विमर्श में शामिल थे। इस योजना का मौजूदा सरकार और देश भर के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था।


उत्तर पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के, जिसने लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह का सामना किया है, खुजदर जिले के एक अन्य कुख्यात आतंकवादी शफीक मेंगल संसद में जाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि मेंगल का नाम चौथी सूची में नहीं है, लेकिन उसके आतंकवादी समूह को सरकार ने 2010 में प्रतिबंधित कर दिया था। प्रवर्तन अधिकारियों का कहना है कि उसके बाद वह अल कायदा से जुड़े संगठन लश्कर-ए झंगवी में शामिल हो गया। अमेरिका द्वारा नामित आतंकी संगठन जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद भी पीछे नहीं है और उसने घोषणा की कि उसका राजनीतिक संगठन मिली मुस्लिम लीग हैदराबाद दक्कन, जूनागढ़ और कश्मीर को पाकिस्तान का अंग बनाएगा।


बेनजीर भुट्टो के करीबी रह चुके सांसद रजा रब्बानी की तरफ से एक चेतावनी आई है-'फैजाबाद में मंच पर बैठे तहरीक लब्बाक पाकिस्तान (टीएलपी) के 150 सदस्य अब नेशनल एसेंबली सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। अल्लाहो अकबर तहरीक के सदस्य भी मुकाबले में हैं। ऐसे में अगर ऐसे पच्चीस लोग भी चुनकर आ गए, तो संसद का माहौल कैसा होगा?' जाहिर है, पाकिस्तान में सांविधानिक लोकतंत्र खतरे में है। 

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