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जिंदगी के खाली पन्नों में प्यार के रंग

रूहानी सिस्टर्स(सूफी गायिका) Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 02 Apr 2020 02:02 AM IST
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रूहानी सिस्टर्स - फोटो : ट्विटर

फुरसत में अक्सर एक सवाल मन में तैरने लगता है कि आखिर क्या है जिंदगी? जिंदादिली का नाम है जिंदगी। हर पल अपने आपको ये एहसास दिलाना कि ''मैं जिंदा हूं'', ही है जिंदगी। जितना दिया अल्लाह ने उसके लिए शुक्र अदा करना ही है जिंदगी। छोटी-छोटी बातों में खुशियां ढूंढना ही है जिंदगी। अपनों के साथ वक्त और उस दौरान घर के बड़ों के अनुभवों से सीख लेना ही है जिंदगी। कभी सोचा है आपने कि अपनों के बगैर कैसी होगी ये जिंदगी? हम हर वक्त खुदा से वक्त मांगा करते थे, क्योंकि काम के सिलसिले में ज्यादातर घर वालों से दूर रहना पड़ता था और आज ऐसी लग रहा है कि शायद भगवान ने हमारी सुन ली।



अब वक्त भरपूर है। चाहे रियाज या हो अपनों के साथ खट्टी-मीठी बातें, घर के हर कोने को अच्छे से देख पा रहे हैं और उन कोनों में सहमे से रिश्तों पर पड़ी धूल को वक्त की फूंक से हटा पा रहे हैं। हालांकि पूरे विश्व में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है, परंतु हमारी सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसलों और खुद की इच्छाशक्ति से हम इस आपदा से भी जल्द ही उबर पाएंगे, ऐसा प्रतीत होता है। एक कलाकार होने के नाते हम रूहानी सिस्टर्स इसे अपना फर्ज समझती हैं कि अपने संगीत के जरिये आसान भाषा में आम जनता तक सरकार का संदेश पहुंचाएं। परंतु हमें लगता है कि सबसे बड़ा योगदान उन डॉक्टरों, नर्सों व पुलिस कर्मियों का है, जो दिन-रात हमारी जिंदगी बचाने की मशक्कत कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें इस बीमारी से खतरा नहीं है, फिर भी वे पूरी निष्ठा व कर्मठता के साथ देश की सेवा में लगे हैं।


उन्हें हमारा सादर नमन है। और हां, दूसरों की खुशी के लिए जीना भी है जिंदगी। कहते हैं , अगर शीघ्र पहुंचना है तो अकेले चलो, परंतु दूर तक जाना है, तो मिलकर चलो। सामाजिक दूरी भले ही जरूरी हों, लेकिन ये दिल के मिलने का वक्त है। ये वक्त मिला है हमें अपने सभी बिखरे हुए जिंदगी के पहलुओं को समेटने का। अब हम दोनों बहनों को ही देख लीजिए- रूहानी सिस्टर्स! हम एक बहन दिल्ली में तो दूसरी देहरादून में रहती हैं। काम के सिलसिले में अलग-अलग शहर और विदेश आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में परिवार के साथ समय बिताना एक सपना सा लगने लगता है। मगर, इन दिनों हमें भरपूर वक्त मिल रहा है।


अपने परिवार के साथ समय बिताने का और साथ ही अपनी कला को और चमकाने का समय। नए-नए आयामों की खोज, अपने भीतर झांकने की ललक, खुद के संग जीने का मौका और आगे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयारी...आने वाले कल की तैयारी है ये। सोशल मीडिया साइट्स पर अफवाहें लगातार चलने वाले न्यूज चैनल्स पर कोरोना से पीड़ित लोगों की खबरें, इन सभी से मन का विचलित होना स्वभाविक है। परंतु सकारात्मकता से हर चीज को देखें, परखें व अपने ऊपर लागू करें, ये कठिन समय भी यकीनन बीत जाएगा। इस मौके पर अपनी ही कव्वाली की कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं-


जिंदगी तू यूं समझ, है एक ऐसा खेल

मेरी तेरी तेरी मेरी में, न निकल जाए रेल

जी ले आज जी भर के, अपनों के संग

जिंदगी के खाली पन्नों में, भर ले प्यार के कुछ रंग।

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