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बजट में सिर्फ हवा हवाई बातें या हैं कुछ और भी!

Sun, 01 Mar 2015 08:30 AM IST
सी एम वासुदेव/पूर्व वित्त सचिव
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजग सरकार का जो पहला पूर्ण बजट पेश किया है, वह विकासोन्मुख बजट है। इसमें निवेश को काफी तवज्जो दी गई है। मुख्य जोर बुनियादी संरचनाओं के निर्माण पर है। आधारभूत ढांचे के निर्माण में सरकार ने सार्वजनिक निवेश का भरोसा दिया है। अपने वित्तीय साधनों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों आदि के जरिये आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की बात इस बजट में शामिल है। साथ निजी क्षेत्र को बुनियादी संरचनाओं में निवेश के लिए कैसे जोड़ा जाए, इसकी भी बात की गई है। इसमें प्राइवेट पार्टनरशिप को कुछ रियायतें देने की भी बात है। साथ ही सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड की भी घोषणा की है। कुल मिलाकर आधारभूत संरचनाओं के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए यह एक अच्छी पहल कही जा सकती है।
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यों तो नीतिगत फैसलों का बजट से कोई सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन बजट भाषण में थोड़ी-सी उसकी चर्चा भी की गई है। व्यावसायिक माहौल को आसान बनाने तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर शीघ्र फैसले की बातें हुई हैं। अगर आप देखें, तो इस बजट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छाप बहुत ज्यादा दिखती है। उनकी जो भी महत्वाकांक्षी योजनाएं थीं, उन सबको इस बजट में तवज्जो दी गई है। लेकिन यह सब किस तरह होगा और कब तक होगा, इसके बारे में कोई विस्तृत रोडमैप नहीं दिया गया है।

मेक इन इंडिया अभियान के लिए आधारभूत संरचनाओं का विकास तो जरूरी है ही, कर व्यवस्था में सुधार भी जरूरी है। इस बजट में आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ कर ढांचे को सरलीकृत करने की भी कोशिश की गई है और कॉरपोरेट टैक्स को अगले चार वर्षों में पांच फीसदी घटाने की भी बात की गई है। कॉरपोरेट जगत को टैक्स में छूट इसलिए दी गई, क्योंकि आस पास के देशों में हमारी तुलना में काफी कम टैक्स वसूला जाता है, जिससे हमारे देश में निवेश प्रभावित होता है। बजट में हमारे यहां बेहतर और आसान व्यावसायिक माहौल बनाने की भी बात की गई है। लेकिन एक चीज जो नहीं की गई है, वह है स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की खामियों को दूर करना। हमारे देश में ज्यादातर विदेशी निवेश एसईजेड में आते हैं, लेकिन उसकी खामियों को दूर करने के बारे में इस बजट में कुछ नहीं कहा गया है।
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कॉरपोरेट सेक्टर और मध्य वर्ग को अलग करके देखना बहुत मुनासिब नहीं है। कॉरपोरेट सेक्टर को इसलिए तवज्जो दी गई है, ताकि औद्योगिक विकास हो। कॉरपोरेट सेक्टर का मतलब होता है, ऐसा संस्थान जो कोई व्यवसाय करे या उद्योग लगाए। अगर औद्योगिक विकास होगा, तो मध्य वर्ग को ही उसमें रोजगार मिलेगा। ऐसे में मध्य वर्ग की उपेक्षा कहां हुई। कॉरपोरेट क्षेत्र और मध्य वर्ग में कोई विरोधाभास नहीं है। हां, इतना जरूर है कि मध्य वर्ग के लोगों को टैक्स स्लैब को बढ़ाए जाने और टैक्स की दरों में कमी की अपेक्षा रही होगी, जो पूरी नहीं हुई। थोड़ी-बहुत कर राहत देने से सरकार के वित्तीय सेहत पर बहुत फर्क नहीं पड़ता। लेकिन मध्य वर्ग के लोगों को यह भी देखना चाहिए कि अगर मुद्रास्फीति की दर नियंत्रण में रहेगी, तो उसका भी लाभ तो उन्हें मिलेगा।

इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर भी ध्यान दिया गया है। कृषि क्षेत्र में कई तरह के कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। सिंचाई के लिए, मनरेगा के लिए, ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास के लिए और पूरे देश भर में मिट्टी की जांच के लिए प्रयोगशाला बनाने आदि की बात की गई है। हो सकता है, कुछ क्षेत्रों में बजटीय आवंटन में कमी की गई हो, लेकिन उन योजनाओं में राज्यों को अपनी जिम्मेदारी बढ़ानी होगी, क्योंकि चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद राज्यों के पास ज्यादा पैसा जाएगा। इससे राज्य अपनी जरूरत के मुताबिक कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र के विकास कर सकेंगे। अब कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की ज्यादा जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।

लोगों की क्रय शक्ति में बढ़ोतरी दो चीजों से होती है-एक तो लोगों की आमदनी बढ़े और दूसरी मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहे।

मुद्रास्फीति अभी नियंत्रण में है, लेकिन लोगों की आय तभी बढ़ेगी, जब विकास दर बढ़े और उसका लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले। विकास दर में लोगों की भागीदारी तभी बढ़ेगी, जब उनका कौशल विकास हो और वे विकास प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। आधारभूत संरचनाओं का विकास भी जरूरी है। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए कौशल विकास और आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर जोर दिया गया है।

जहां तक सर्विस टैक्स को बढ़ाकर 14 फीसदी करने की बात है, तो इसे अल्पकालिक तौर पर देखना चाहिए। जब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हो जाएगा, तो सर्विस टैक्स भी उसी में समाहित हो जाएगा। यह जीएसटी की दिशा में एक कदम है। लेकिन जब तक जीएसटी नहीं आएगा, तब तक जरूर लोगों को इसकी मार झेलनी पड़ेगी। इसकी भरपाई के लिए सरकार को आयकर में थोड़ी रियायत दे देनी चाहिए थी। उम्मीद करनी चाहिए कि अगर दबाव बढ़ेगा, तो संसद में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री इसमें कुछ संशोधन करें।

अभी भले ही बाजार में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन जैसे-जैसे बजट की सारी बातें सामने आएंगी, एक-दो दिन में बाजार में सुधार दिखेगा, क्योंकि लोगों की उम्मीद के मुताबिक, यह बजट विकास को बढ़ावा देने वाला है। लेकिन सरकार को बजट की अच्छाइयों को लोगों को समझना होगा, अन्यथा इस बात का बहुत डर है कि लोग इसे सिर्फ हवाई बातें समझें, क्योंकि इन चीजों का क्रियान्वयन कैसे होगा, इसका रोडमैप बजट में नहीं है।
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