ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की रोक लगने के बावजूद ओजोन परत में इस साल 20 वर्षों का सबसे बड़ा छेद दिखाई दिया है। वैज्ञानिकों ने इसके संकेत मई में ही देख लिए थे। अनुमान है कि इस बार यह छेद अक्तूबर से नवंबर तक बना रह सकता है।
2.7 करोड़ वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हुआ क्षेत्रफल
वायुमंडल की ओजोन परत में छेद होता है और फिर भरता भी रहता है, लेकिन इस साल सितंबर में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छेद का क्षेत्रफल 2.7 करोड़ वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया। यह इस मौसम में अब तक दर्ज दूसरा सबसे बड़ा छेद है। मई में ही हमें इसके गंभीर होने के संकेत मिल गए थे। उस समय वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव दिखाई दे रहे थे। ध्रुव के ऊपर बेहद ठंडे तापमान और मजबूत ध्रुवीय भंवर ने ओजोन छेद के जल्दी और बड़े पैमाने पर बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दीं।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अब भी कर रहा है काम
ओजोन परत की रक्षा के लिए दुनिया भर में लागू ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ अब भी काम कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का इस्तेमाल चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है। वर्ष 2000 के आसपास अपने चरम के बाद समताप मंडल में ऐसे पदार्थों का स्तर करीब एक तिहाई घट चुका है। इस साल ओजोन छेद का क्षेत्रफल भले ही बड़ा रहा हो, लेकिन इसकी गहराई पिछले कुछ बड़े छेदों जितनी नहीं है। जिसका अर्थ है कि कुल मिलाकर ओजोन का नुकसान कम हुआ है।
छेद जल्दी क्यों बढ़ा?
इस साल ओजोन छेद का क्षेत्रफल अगस्त में ही सामान्य से पहले बढ़ना शुरू हो गया था। उस समय समताप मंडल का तापमान भी कम था। सितंबर की शुरुआत में छेद तेजी से बढ़ा और इसका क्षेत्रफल 2.74 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया। इससे पहले ऐसा क्षेत्रफल केवल दो बार दर्ज हुआ था। वर्ष 2000 में ओजोन छेद कुछ समय के लिए 2.8 करोड़ वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया था, जबकि 2015 में अक्तूबर के दौरान यह 2.79 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक पहुंचा था।
यह बनता कैसे है?
ओजोन छेद शुरुआती वसंत में समताप मंडलीय ध्रुवीय भंवर के भीतर बनता है। यह तेज हवाओं का एक बड़ा घेरा होता है, जो हर सर्दी में अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागर के चारों ओर बनता है। भंवर के भीतर तापमान बहुत कम होने पर विशेष प्रकार के बादल बनते हैं, जिन्हें ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल कहा जाता है। इन बादलों के कणों की सतह पर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं ओजोन को नष्ट करने वाली गैसों को सक्रिय कर देती हैं। इससे ओजोन तेजी से कम होने लगती है। छेद बनने के बाद वह कितने समय तक बना रहेगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ध्रुवीय भंवर के भीतर की हवा कितनी अलग-थलग रहती है। ठंडा और मजबूत भंवर ओजोन छेद को लंबे समय तक बनाए रख सकता है। इसलिए बड़े पैमाने पर होने वाली वायुमंडलीय हलचल भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की भूमिका
1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के बाद से ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों की सांद्रता कम हुई है। लेकिन कभी-कभी वसंत आने से पहले ध्रुवीय भंवर की वायुमंडलीय गतिशीलता ऐसी स्थिति बना देती है, जिससे वह अधिक मजबूत और ठंडा हो जाता है। ऐसा होने पर रासायनिक स्तर पर ओजोन की रिकवरी जारी रहने के बावजूद छेद बड़ा, गहरा और लंबे समय तक बना रह सकता है।
मई में दिखे थे संकेत
गंभीर ओजोन छेद की भविष्यवाणी करना अब भी वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है। मई 2026 में उपग्रहों से मिले आंकड़ों में वायुमंडलीय संरचना में ऐसे बदलाव दिखे, जो ध्रुवीय भंवर के मजबूत होने के संकेत थे। इन्हीं संकेतों के आधार पर सितंबर 2026 के लिए बड़े ओजोन छेद की भविष्यवाणी की गई थी। सितंबर के अब तक के आंकड़े इन शुरुआती अनुमानों से मेल खाते हैं। यदि ध्रुव के ऊपर वायुमंडलीय परिस्थितियां नहीं बदलतीं तो यह छेद अक्तूबर और नवंबर तक बना रह सकता है। लेखकों का अनुमान है कि 2026 का ओजोन छेद अब तक के दस सबसे गंभीर छेदों में शामिल हो
सकता है।
2020 के दशक में भी दिखे बड़े ओजोन छेद
2026 में बड़ा ओजोन छेद पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं है। वर्ष 2020 से 2023 के बीच भी अंटार्कटिका के ऊपर कई बड़े और लंबे समय तक बने रहने वाले छेद देखे गए थे। 2019-20 में ऑस्ट्रेलिया की जंगल की आग के धुएं और 2021 में कैरेबियाई क्षेत्र में ला सूफ्रिएर ज्वालामुखी के विस्फोट से निकले एरोसोल को उन वर्षों में ओजोन क्षरण बढ़ने से जोड़ा गया है। 2022 में हंगा टोंगा-हंगा हापाई के समुद्र के भीतर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को भी 2023 में ओजोन छेद के सामान्य से पहले बनने से जोड़ा गया था। इस लिहाज से 2020 का दशक ओजोन परत की रिकवरी के लिए असामान्य
रहा है।
मौसम पर असर
ओजोन छेद का असर पूरे दक्षिणी गोलार्ध के मौसम और जलवायु पर पड़ता है। गंभीर ओजोन छेद के बाद साउदर्न एन्युलर मोड सकारात्मक अवस्था की ओर बढ़ सकता है। इससे न्यूजीलैंड में अपेक्षाकृत शांत हवाओं तथा गर्म और अधिक नम मौसम की स्थिति बन सकती है, खासकर पश्चिमी तट पर। ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी तट पर इसका संबंध अधिक वर्षा से भी है।
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कब तक होगा ठीक?
दीर्घकाल में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत के 2090 से पहले पूरी तरह ठीक होने का अनुमान है। लेकिन हाल के वर्षों में ओजोन छेद दक्षिणी वसंत में अधिक समय तक बना रहा है। वैश्विक वायुमंडलीय गतिशीलता में बदलाव लंबे समय तक रहने वाले ओजोन छेदों की संभावना बढ़ा सकते हैं। इससे ओजोन परत की रिकवरी के मौजूदा अनुमान में वायुमंडलीय बदलावों के कुछ महत्वपूर्ण पहलू छूट सकते हैं। न्यूजीलैंड के लिए इसका अर्थ है कि आने वाले कई दशकों तक ओजोन छेद वहां की हवाओं और तापमान को प्रभावित कर सकता है।