नई चीजों की चाह क्यों नहीं देती लंबे समय की खुशी?
येल यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञान की प्रोफेसर और खुशी पर शोध करने वाली लॉरी सैंटोस के अनुसार, हम अक्सर नई-नई चीजें पाने की ऐसी दौड़ में फंस जाते हैं, जो हमें लंबे समय तक खुश नहीं रखतीं। स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट डेविड ईगलमैन के मुताबिक, हमारा दिमाग नई चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होता है। जब हमें कुछ नया दिखाई देता है, तो दिमाग उसे खास तौर पर नोटिस करता है और याद के रूप में दर्ज कर लेता है। पर, कुछ समय बाद वह चीज हमें उतनी खास नहीं लगती। फिर हमारा ध्यान दूसरी नई चीज की ओर चला जाता है।
डोपामाइन बढ़ाता है नई चीजों को आजमाने का आकर्षण
नई चीज मिलने या उसे देखने पर दिमाग में डोपामाइन नाम का रसायन सक्रिय होता है। इससे हमारे अंदर उस चीज को जानने, आजमाने या पाने की इच्छा बढ़ सकती है। यही वजह है कि नई चीजें हमें जल्दी आकर्षित करती हैं, पर उनका आकर्षण ज्यादा समय तक नहीं रहता।
‘नॉवेल्टी ऑडिट’ से पहचानें अपने आकर्षण के ट्रिगर
व्हार्टन की प्रोफेसर केटी मिल्कमैन के मुताबिक, इस आदत को कम करने का एक तरीका है-‘नॉवेल्टी ऑडिट’। यानी पहले पहचानें कि आपको किस आकर्षण पर नियंत्रण करना है-महंगी शॉपिंग, वायरल प्रोडक्ट्स या विज्ञापनों से भरा सोशल मीडिया। फिर, ऐसे नियम बनाएं, जो खरीदारी को मुश्किल बना दे। सेव किया हुआ कार्ड हटाएं, अनावश्यक सब्सक्रिप्शन रद्द करें और शॉपिंग एप्स फोन से हटा दें। मिल्कमैन इसे ‘कमिटमेंट डिवाइस’ कहती हैं, यानी ऐसे छोटे अवरोध, जो हमें तत्काल इच्छा के बजाय लंबे समय के फायदे को चुनने में मदद करें।
नई चीजों से दूरी नहीं, जरूरत को समझना जरूरी
हालांकि, ऐसा करने का मतलब यह कतई नहीं कि नई चीजें खरीदना पूरी तरह बंद कर दें। बस अगली बार कोई चीज आकर्षित करे, तो पहले खुद से पूछें कि क्या मुझे सच में इसकी जरूरत है, या मैं सिर्फ इसके नए होने से प्रभावित हूं।