कुछ वर्ष पहले तक क्रिकेट जगत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई की तूती बोलती थी। लेकिन तीन साल पहले बीसीसीआई की देखरेख के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति के समय में आईसीसी ने हालात का फायदा उठाकर बीसीसीआई के महत्व को खत्म कर दिया। दिलचस्प यह है कि इसके पीछे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके और आईसीसी के चेयरमैन शशांक मनोहर की योजनाओं का हाथ रहा। लेकिन अभी दो माह पहले बीसीसीआई का चुनाव होने पर सौरव गांगुली के अध्यक्ष पद संभालते ही हालात फिर से बदलने लगे हैं और लगता है कि क्रिकेट में भारतीय दबदबे के साथ 'बिग थ्री' (भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) का जमाना फिर से आने वाला है।
इस साल अक्तूबर माह में आईसीसी बोर्ड की दुबई बैठक में मौजूदा विश्व कपों के अलावा दो और आईसीसी टूर्नामेंटों को 2023 से 2031 के फ्यूचर टूर कार्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया। इसका मतलब था कि हर साल आईसीसी टूर्नामेंट का आयोजन होता, क्योंकि इस दौरान दो आईसीसी विश्व कप और चार टी-20 विश्व कप होने ही थे। इससे एक तो दो देशों की सीरीजें प्रभावित होतीं और राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड का राजस्व कम होता और आईसीसी के राजस्व में बड़ा इजाफा हो जाता। पर बीसीसीआई में बदलाव होते ही इस स्थिति को समझा गया और इसकी काट निकालने का फैसला किया गया। इसके तहत बीसीसीआई पदाधिकारियों ने पिछले हफ्ते इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के पदाधिकारियों से मुलाकात की। यह बताया जा रहा है कि इस बैठक में आईसीसी के फ्यूचर टूर कार्यक्रम, उसके वित्तीय मॉडल और संचालन के तरीके का विरोध करने का फैसला किया गया।
बीसीसीआई और ईसीबी दोनों जानते हैं कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को जोड़े बिना बात बनने वाली नहीं है। पर दोनों बोर्ड के संचालकों को अपने साथ क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को मिला पाने का भरोसा है। असल में 14 जनवरी से ऑस्ट्रेलिया टीम भारत में टी-20 और वनडे सीरीज खेलने के लिए आ रही है। इस दौरान क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन अर्ल एडिंग्स की टीम के साथ बीसीसीआई पदाधिकारियों की बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद लगता है कि क्रिकेट के 'बिग थ्री' फिर से एकजुट हो जाएंगे। लेकिन इस एकजुटता के बाद भी क्या एन श्रीनिवासन के चेयरमैन रहते बनाया गया बिग थ्री वित्तीय मॉडल फिर से लागू हो पाएगा, यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा। इस मॉडल में व्यवस्था यह थी कि जो देश जितना ज्यादा राजस्व लाने में योगदान करता है, उसे आईसीसी से उतनी ही धनराशि मिले। हम सभी जानते हैं कि आईसीसी को मिलने वाली राशि का 70 प्रतिशत भारत से आता है। इसलिए बिग थ्री मॉडल में सबसे ज्यादा राशि भारत को मिलनी थी। इस मॉडल के अंतर्गत बीसीसीआई को करीब 57 करोड़ डॉलर की राशि मिलनी थी, पर शशांक मनोहर ने आते ही इस मॉडल को खत्म कर दिया, इससे बीसीसीआई को मिलने वाली रकम घटकर 40 करोड़ डाॅलर के करीब रह गई। यह भी कहा जा रहा है कि आईसीसी ने भारत की इस रकम का अभी तक भुगतान नहीं किया है।
आईसीसी का प्रस्तावित फ्यूचर टूर कार्यक्रम लागू हो जाता है, तो प्रमुख देशों के क्रिकेट बोर्ड की कमाई में और कमी आ जाएगी। खासतौर से बीसीसीआई, ईसीबी और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं। इसलिए इन तीनों प्रमुख बोर्ड का मिलना मजबूरी भी है। आईसीसी भी जानता है कि बिना इन तीन देशों के किसी भी योजना को चलाने के कोई मायने नहीं हैं। देखने वाली बात यह होगी कि आईसीसी कितना बैकफुट पर जाता है।