सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) की मंगलवार को हुई बैठक के बाद सरकार ने घोषणा की कि उसने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में चार सितारा जनरल का एक पद सृजित करने को मंजूरी दे दी है। सीडीएस के नाम की अभी घोषणा नहीं हुई है। ऐसा 1999 में कारगिल संघर्ष के बाद उच्च रक्षा प्रबंधन का मूल्यांकन करने और सुरक्षा बलों के बीच एकजुटता बढ़ाने के लिए गठित कारगिल और अरुण सिंह कमेटियों द्वारा सरकार को सुझाव दिए जाने के बीस साल बाद किया गया है।
सरकार द्वारा वर्ष 2011 में गठित नरेश चंद्र कमेटी ने कहा था कि जब तक सीडीएस की घोषणा नहीं होती, तब तक चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी (सीओएससी) के स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की जानी चाहिए। सीओएससी एक कमेटी है, जिसमें तीनों सैन्य सेवाओं के प्रमुख शामिल हैं और बारी-बारी से सबसे वरिष्ठ अधिकारी उसके मुखिया होते हैं। वर्ष 2016 में शेकतकर कमेटी ने फिर से सीडीएस की नियुक्ति पर जोर दिया। इस तरह सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन में सुधारों का अध्ययन करने के लिए बनाई कमेटियों ने एक ही तरह की सिफारिश की, हालांकि सरकारें कई कारणों से हिचकिचाती रहीं, मुख्य रूप से एक ही हाथ में अतिरिक्त शक्ति होने के कारण तख्तापलट की आशंकाओं के कारण। मनमोहन सिंह सरकार अपने पूरे कार्यकाल के दौरान यह कहती रही कि वह सीडीएस की नियुक्ति पर राजनीतिक सहमति चाहती है, जबकि मोदी सरकार इसकी घोषणा करने के लिए दूसरे कार्यकाल की प्रतीक्षा करती रही।
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष के अंत से पहले सीडीएस को नामित किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व में सीडीएस के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सटीक जिम्मेदारियों, एक सक्षम ढांचे और अन्य सभी मुद्दों को निर्धारित करने के लिए एक कार्यान्वयन समिति की स्थापना की गई। इस समिति के निष्कर्ष को सीसीएस ने 24 दिसंबर को मंजूरी दी।
सरकार ने सीडीएस के कर्तव्यों का चार्टर भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि सीडीएस की कई भूमिकाएं होंगी। सबसे पहला, वह सीओएससी के स्थायी अध्यक्ष होंगे, जो इस आवश्यक संगठन में स्थिरता लाएंगे। इस भूमिका में उन्हें मुख्यालय के एकीकृत रक्षा कर्मचारियों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी, जिसे कारगिल संघर्ष के बाद स्थापित किया गया था और जो वर्तमान में सभी संयुक्त बलों को संभालता है। दूसरा, वह संयुक्त बलों के सभी संयुक्त कमान के लिए जिम्मेदार होंगे, जो वर्तमान में संचालित हैं। तीसरा, वह त्रि-सेवा मामलों पर रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार होंगे, जबकि तीनों सैन्य प्रमुख सेवा से संबंधित विशिष्ट मामलों पर रक्षा मंत्री को निरंतर सलाह देते रहेंगे। चौथा, वह संयुक्त कमान को छोड़कर किसी भी सैन्य कमान को संचालित नहीं करेंगे। इसका मतलब यह है कि तीनों सैन्य प्रमुख वर्तमान की तरह अपनी सेना की कमान संभालते रहेंगे। पांचवां, वह रक्षा अधिग्रहण परिषद और रक्षा योजना समिति के सदस्य होंगे।
अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बात, वह रक्षा मंत्रालय के भीतर एक नया विभाग संभालेंगे, जिसे सैन्य मामलों का विभाग (डीएमए)कहा जाएगा। डीएमए में सैन्य और असैन्य कर्मचारी होंगे। विभाग को संयुक्त योजना और उनकी आवश्यकताओं के एकीकरण के माध्यम से खरीद, प्रशिक्षण और स्टाफ में एकजुटता को बढ़ावा देने का काम सौंपा जा रहा है। डीएमए को एकजुटता के माध्यम से संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए मौजूदा कमानों के पुनर्गठन की सुविधा और स्वदेशी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी काम सौंपा गया है। इन सभी को तीन साल के भीतर लागू किया जाना है।
सीडीएस का पद सरकार का हिस्सा होगा, न कि बाहर का, जैसा कि सशस्त्र बलों के साथ अब तक का मानक है। हालांकि वर्तमान में सेवा मुख्यालय को एकीकृत मुख्यालय माना जाता है, जिसे रक्षा मंत्रालय के ढांचे से बाहर रखा गया है। यदि सीडीएस को सशस्त्र बलों और रक्षा मंत्री के बीच प्रधान सलाहकार के रूप में तालमेल बिठाना है, तो उसे रक्षा मंत्रालय के भीतर लाना जरूरी है। अब तक रक्षा मंत्रालय में सशस्त्र बलों का कोई सदस्य नहीं है, जिसके कारण सैन्य मामलों पर फैसले अनभिज्ञ लोगों द्वारा लिए जाते हैं। इसके अलावा सीडीएस से निकलने वाले मामलों को रक्षा सचिव के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे रक्षा मंत्री को भेजा जाएगा। इस प्रकार रक्षा मंत्री को सही सलाह दी जा सकती है और इससे तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
दूसरी बात, सीडीएस की भूमिका और कार्य का अर्थ है कि भारतीय सशस्त्र बल शुरू में योजना, खरीद और प्रशिक्षण में संयुक्तता की ओर बढ़ेंगे, बाद में संयुक्त लॉजिस्टिक और आखिर में कमांड्स को नियंत्रित करेंगे, जो भविष्य की आवश्यकता है। वर्तमान सशस्त्र बलों के संगठन में 17 अलग-अलग सेवा कमांड हैं, जिनमें से अधिकांश न तो एक जगह स्थित हैं और न ही उनका उद्देश्य समान है, जिसके चलते विभिन्न सेवाओं के संचालन की योजना और तैयारी अलग-अलग होती है और वे स्वतंत्र रूप से क्षमता विकास करते हैं। भारत से बाहर सेनाओं की तैनाती उनकी जिम्मेदारी होगी।
कुल मिलाकर मौजूदा सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे हर सरकार हिचकती रही थी। उसने सीडीएस की घोषणा की है और विभिन्न सैन्य बलों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने, खर्च कम करने और संयुक्त संचालन और दक्षता बढ़ाने के लिए कर्तव्यों के एक चार्टर के साथ नियुक्ति की घोषणा की है। डीएमए को रक्षा मंत्रालय में शामिल करके सरकार ने सशस्त्र बलों को मंत्रालय द्वारा संभालने के तरीके को बदल दिया है। सबसे अहम यह कि सशस्त्र बल धीरे-धीरे और लगातार संयुक्त कमांड की ओर बढ़ेंगे, जो क्षमताओं को बढ़ाएंगे और सैन्य शक्ति का समन्वय करेंगे।
इसमें शक नहीं कि ऐसी कवायद में शुरू में समस्याएं होती हैं, लेकिन समय के साथ उस पर काबू पा लिया जाएगा। सरकार ने पहला कदम उठा लिया है, इसकी सफलता सीडीएस के रूप में नियुक्त व्यक्ति और रक्षा मंत्रालय और तीनों सैन्य प्रमुखों से उन्हें मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करेगी।