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भारत-कनाडा संबंध: निज्जर की हत्या की बरसी पर श्रद्धांजलि... आखिर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की समस्या क्या है?

रवींद्र दुबे
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:45 AM IST

सार

इटली में संपन्न जी-7 देशों के सम्मेलन में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एक ओर तो भारत और कनाडा के बीच के मुद्दों को आपसी सद्भाव के साथ हल करने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर कनाडा की संसद में भारत द्वारा आतंकवादी घोषित निज्जर की हत्या की बरसी पर उसे श्रद्धांजलि दी जाती है।
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कनाडा के पीएम के साथ प्रधानमंत्री मोदी (फाइल) - फोटो : एक्स/जस्टिन ट्रूडो


विगत 18 जून को सिख प्रदर्शनकारियों ने निज्जर की हत्या की बरसी कनाडा स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खून का प्रतीकात्मक मुकदमा चला कर मनाई। होव स्ट्रीट के एक ब्लॉक पर हुए इस मुकदमे में अभिनेताओं द्वारा बनाई गई एक फर्जी जूरी और सफेद घुंघराले विग में एक जज भी सम्मिलित था, जिसने 'अभियोजक' को पिछले साल सरी में हुई इस हत्या में मोदी की संलिप्तता के सुबूत पेश करने के लिए आमंत्रित किया। इस मुकदमे की शुरुआत से पहले एक पिंजरे में जेल की धारियों वाली पोशाक में मोदी के पुतले का जुलूस भी निकाला गया।


इससे पहले, 11 जून को टोरंटो के ब्राम्पटन इलाके में ऑपरेशन ब्लू स्टार की चालीसवीं बरसी पर इंदिरा गांधी हत्याकांड की एक झांकी भी निकाली गई थी। इस साल कनाडा में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के बाहर भी कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने भारतीय झंडे जलाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट को पैरों से रौंदा और उस पर थूका। दरअसल इस साल कनाडा स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के सामने इस तरह की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं और पिछले साल से लेकर अब तक तो कुछ ज्यादा ही। भारत और विदेश में खालिस्तान आंदोलन को लेकर तनाव का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा को एक ऐसे देश के रूप में देखा जाता है, जहां आंदोलन सबसे ज्यादा मजबूत है, और इसलिए भारत में इसकी तीखी आलोचना हुई है, खासकर ट्रूडो के आरोपों के मद्देनजर कि भारत निज्जर की हत्या में शामिल है।


वर्ष 2012 में भारत के विदेश मंत्री ने देश की छह दिवसीय यात्रा पर आए तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के समक्ष 'कनाडा में भारत विरोधी बयानबाजी को फिर से शुरू करने' का मुद्दा उठाया था। हार्पर ने कहा था कि कनाडा एकजुट भारत का समर्थक है, लेकिन उन्होंने खालिस्तान के समर्थन में शांतिपूर्ण बातचीत को चुप कराने से इन्कार कर दिया था। हार्पर ने कहा, 'हम अभिव्यक्ति की राजनीतिक स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।' ट्रूडो से जब पिछले सितंबर में नई दिल्ली में जी-20 सम्मेलन के दौरान कनाडा में सिख खालिस्तानी आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने भी हार्पर की प्रतिक्रिया का समर्थन किया।


भारत के बाहर कनाडा में सिखों की सबसे बड़ी आबादी है, जहां उनकी संख्या लगभग 7,70,000 है, जो उस देश की आबादी का लगभग 2.1 प्रतिशत है। अन्य देशों में सिखों की आबादी एक प्रतिशत से भी कम है। गौरतलब है कि कनाडा की राजनीति में भी सिखों की सक्रियता अच्छी-खासी है और उन्होंने अपने मकसद तक पहुंचने में राष्ट्रीय राजनीतिक मंच का जबर्दस्त उपयोग किया है। इनमें से कुछ ऐसे भी कारण हैं, जिन्हें भारत अपने हितों के खिलाफ मानता है। उदाहरण के लिए, संघीय नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह, जो सिख हैं, ने ओंटारियो में एक सांसद के रूप में अपने शुरुआती राजनीतिक कॅरिअर का अधिकांश समय भारत के 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार के रूप में मान्यता दिलाने के लिए पैरवी करने में बिताया। 1984 के दंगों की नरसंहार के रूप में निंदा करने वाला एक प्रस्ताव 2017 में ओंटारियो में पारित किया गया था। वर्ष 2018 में सिंह, जो तब तक संघीय एनडीपी नेता बन गए थे, ने कहा कि संघीय स्तर पर भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि कनाडा सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया है।


जगमीत सिंह की नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी कनाडाई संसद में चौथे नंबर की पार्टी है। इसके अलावा, इस पार्टी के राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश कोलंबिया और मनिटोबा जैसे प्रांतों में उसकी सरकार है और अलबर्टा, सस्काच्वान और ओंटारियो में वह प्रमुख विपक्षी पार्टी है और क्यूबैक, न्यू ब्रूनस्विक और प्रिंस एडवर्ड आईलैंड को छोड़कर कई प्रांतों की विधायिका में उसके सदस्य हैं। पिछले दिनों ही इटली में संपन्न जी-7 देशों के सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की एक अनौपचारिक मुलाकात हुई थी, जिसमें आपसी सद्भाव और सहयोग से दोनों देशों के बीच सामान्य मुद्दों को हल करने के प्रयासों की दुहाई दी गई थी। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें भारतीय और कनाडाई मीडिया में छाई हुई थीं। इस मुलाकात की अल्पावधि में ही ये सब घटनाएं हो गईं।


बहरहाल, कनाडाई संसद द्वारा हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की बरसी पर उसके सम्मान में एक मिनट का मौन रखने से आहत भारतीय वाणिज्यिक  दूतावास ने कनाडा के वैंकूवर में 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क) बम विस्फोट के पीड़ितों के लिए एक स्मारक सेवा का आयोजन किया है। 23 जून, 1985 को कनाडा से लंदन होते हुए भारत आने वाले एयर इंडिया के विमान में आयरिश तट पर विस्फोट हो गया, जिसमें 86 बच्चों सहित सभी 329 लोग मारे गए थे। कनाडा की धरती पर यह सबसे बड़ी आतंकवादी घटना थी। यह स्मारक सेवा 23 जून, 2024 को शाम स्टेनली पार्क के सेपरले खेल के मैदान क्षेत्र में एयर इंडिया मेमोरियल में निर्धारित की गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडा इस घटना को किस तरह से लेता है।

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