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Budget 2023: लोकलुभावन नहीं, भविष्योन्मुखी बजट

सीएम वासुदेव
Updated Thu, 02 Feb 2023 06:37 AM IST

सार

बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में आवास पर तवज्जो दी गई है, शहरी आधारभूत परियोजनाओं पर भी जोर दिया गया है। लेकिन सबसे ज्यादा जोर विकास को गति देने पर है।
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बजट 2023 - फोटो : सोशल मीडिया


थोड़ी-बहुत लोकलुभावन चीजें हैं भी और ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में लोगों की अल्पावधि और मध्यावधि जरूरतों को संबोधित करना पड़ता है। बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में आवास पर तवज्जो दी गई है, शहरी आधारभूत परियोजनाओं पर भी जोर दिया गया है। लेकिन सबसे ज्यादा जोर विकास को गति देने पर है, क्योंकि पूंजीगत खर्च बढ़ाया गया है। यह समझना जरूरी है कि एक तरफ तो आप कह रहे हैं कि इस साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.4 प्रतिशत होगा, मतलब सरकारी खर्चे को पूरा करने के लिए आप अपनी जीडीपी का 6.4 प्रतिशत बाजार से उधार लेंगे। बाजार से उधार लेकर उसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने से सरकार को उस उधार को चुकाने में आसानी होती है। यह जिम्मेदाराना कदम है कि बाजार से जो भी पैसा आप उधार लेंगे, उसमें से अधिकतम इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगाएंगे, ताकि ग्रोथ के माध्यम से उधार चुकाने में मदद मिलेगी।


मध्यवर्ग को टैक्स में रियायत दी गई है, जिससे खपत को बढ़ावा मिलेगा। कर में रियायत देने से लोगों के हाथों में पैसा रहेगा, खपत बढ़ेगी और ग्रोथ होगा, लेकिन दीर्घकालीन अर्थों में वही कर नीति अच्छी होती है, जो स्थिर हो और उसमें हर साल बदलाव न हो। संभवतः ग्रोथ की चुनौतियों के मद्देनजर ऐसा किया गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से गरीब तबके के लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे खपत बढ़ेगी और विकास को गति मिलेगी। कर नीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि आयात शुल्क को कम किया गया है, जो अच्छी बात है। इससे मुद्रास्फीति को कम करने में तो मदद मिलेगी ही, आसियान देशों के साथ व्यापारिक समझौते करने में भी मदद मिलेगी। कृषि को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर यह लोकलुभावन नहीं, बल्कि भविष्योन्मुखी बजट है, जिसमें विकास को गति देने के साथ लोगों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की गई है।

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