भई शोहरत किसे नहीं लुभाती! शोहरत के लिए तो लोग न जाने कौन-कौन से हथकंड़े अपनाते हैं। न दिन देखते हैं, न रात; आंख बंद करके इसके पीछे भागते रहते हैं। ऐसे में शोहरत यदि झोली में आ गिरे, तो भला कौन जमीन पर पैर रखेगा!
ऐसा ही कुछ मेरी झाड़ू देवी के साथ हुआ। जब से उसने टीवी पर अन्य झाड़ुओं को बड़े-बड़े महानुभावों के हाथों में सुसज्जित देखा है, बावरी-सी हो गई है और मुझसे वर्षों पुराना नाता खत्म करने पर आमादा है। आज उसने मुझसे दो टूक शब्दों में कह दिया है, बीबी जी, मैंने अपना बहुत-सा कीमती समय आपके साथ बिताया, अब और न रह सकूंगी।
मेरा इन छोटे-छोटे कमरों में दम घुटता है। मैं भी अब लंबी सड़क तथा खुली हवा में सांस लेना चाहती हूं। एक अरसे से मैं आपके साथ हूं, पर मुझे कोई नहीं जानता। लेकिन देखो उन झाड़ुओं की किस्मत, मंत्रियों के हाथों में क्या आईं पूरे देश ने पहचाना। मीडिया वालों ने तो तहे दिल से सम्मान किया। सो जयराम जी की, अब मैं चली।
मैं उसे रोककर समझाने का प्रयत्न करने लगी, अरी ओ मेरी सुबह-शाम की संगिनी! जो तुम देख रही हो, वह सत्य नहीं है। जो झाड़ू इन सम्मानित हाथों में दिख रही है, इनका कोई सम्मान नहीं है। मैं तुम्हें अंदर की बात बताती हूं; एक मिनट के लिए किसी बड़े लोगों के हाथों में जाओगी, फोटो खिंचवाओगी, फिर किसी गंदे कोने में टिका दी जाओगी। फिर वहीं पड़ी रहकर तुम अपना अस्तित्व खो दोगी।
इसलिए मेरी बात पर गौर करो और झूठी शोहरत के पीछे न भागो। यदि मेरी बात नहीं मानोगी, तो न घर की रहोगी और न घाट की।
मेरा हाथ झटक कर वह बोली, जाओ जी अब आप मुझे और न बरगलाओ। अब मैं आपकी चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने वाली। हर किसी को उन्नति का अधिकार है। मुझे अपना भविष्य इन छोटे कमरो में नहीं, बड़े लोगों के हाथों में ही उज्ज्वल दिखाई दे रहा है।
जाते-जाते मुझे पाठ पढ़ा गई, बीबी जी, ऊंचा सोचोगी, तभी तो ऊंचाई पर जाओगी। अवसरवादी बनोगी, तभी तो अवसरों का लाभ उठा पाओगी। संसार बड़ा है, बाहर निकल कर देखो।