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ब्राह्मण कुमार की हत्या का पाप

Tue, 09 Jul 2013 10:40 PM IST
शिवकुमार गोयल
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त्रिशिरस ऋषि पुत्र थे, लेकिन असुरों के कुसंग में पड़कर वह दुष्कर्मों में रत रहने लगे। वह एक ओर असुरों के साथ सुरापान करते, दूसरी तरफ देवताओं को यज्ञ से मिलने वाला भोजन (हवि) हड़प जाते थे। हवि के अभाव में देवता भूखे रह जाते। इसलिए वे दुर्बल होने लगे।
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देवराज इंद्र भांप गए कि त्रिशिरस के दोहरे आचरण के कारण देवताओं को हवि नहीं मिल रहा है। एक दिन इंद्र त्रिशिरस के आश्रम जा पहुंचे। उन्होंने कहा, तुम ब्राह्मण की जगह असुर हो गए हो। तुम्हारे कर्म धर्म के विपरीत हैं। तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है। यह कहकर उन्होंने त्रिशिरस का सिर काट डाला। त्रिशिरस की हत्या होते ही उसके साथ के ब्राह्मणों ने कहा, इंद्र को ब्रह्महत्या का पाप लगा है। उन्हें प्रायश्चित करना होगा।

कुछ भ्रमित ऋषियों ने भी इंद्र को पाप का भागी घोषित कर डाला। अब इंद्र ने वृक्षों, पृथ्वी और दैवी शक्ति का आह्वान किया। देवताओं के प्रकट होने पर इंद्र ने पूछा, क्या अधर्म में लगे रहने वाले त्रिशिरस की हत्या का मुझे पाप लगेगा? वृक्ष देवता ने उत्तर दिया, धर्म व मर्यादा का हनन करनेवाला कोई व्यक्ति ऋषि या ब्राह्मण नहीं होता, वह पापी होता है। पृथ्वी ने कहा, त्रिशिरस के क्रूर कर्मों के कारण जो पाप हुआ है, उसकी मैं साक्षी हूं। दैवी शक्ति ने कहा, वह देवताओं से छल करता था। उसकी हत्या पुण्यदायक है। और इस तरह इंद्र की जिज्ञासा शांत हुई।
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