देश को आजादी मिलने के बाद भारत के लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपने राष्ट्र के पुनर्निर्माण, बदलाव और विकास का निर्णय लिया था। इस क्रम में हमारे राष्ट्र निर्माताओं द्वारा 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकृत किया जाना लोकतंत्र की दिशा में मील का पत्थर था, तो 26 जनवरी, 1950 को संविधान का लागू होना वह ऐतिहासिक क्षण था, जिसने एक नए दृष्टिकोण के साथ भारत के निर्माण की नींव रखी। भारत का संविधान नियमों की पुस्तक मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत के नागरिकों के लिए एक प्रगतिशील, कल्याणकारी एवं समतामूलक राष्ट्र के निर्माण का ब्लू प्रिंट है। यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के महान राजनेताओं एवं संविधान निर्माता मनीषियों के विचारों और दर्शन पर आधारित वह पवित्र ग्रंथ है, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता एवं संस्कृति को आधार बनाकर हमारे देश को पुन: विश्व गुरु बनाने की आकांक्षा को मूर्त रूप देने का प्रयास करता है।
यह मानवीय अधिकारों, राष्ट्रीय कर्त्तव्यों तथा राजकीय कृत्यों का अद्भुत संकलन है। यह भारत के नागरिकों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। हमारा संविधान इस महान प्राचीन राष्ट्र के सभी नागरिकों के लिए स्वतंत्रता, समानता और न्याय में हमारे विश्वास को और अधिक मजबूत बनाता है। एक नागरिक होने के नाते हमारा सबसे बड़ा और पुनीत कर्त्तव्य है अपने संविधान को समझना, आत्मसात करना एवं उसके अनुरूप आचरण करना। देश में लोकतंत्र को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को उन मूल्यों और आदर्शों के संबंध में बताएं, जिनसे हमारा स्वतंत्रता संग्राम तथा संविधान अनुप्राणित था। एक प्रबुद्ध समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। इसी भावना को मूल में रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने लोकप्रिय शब्द ‘केवाईसी’ को नया अर्थ देते हुए वर्तमान पीढ़ी के बीच सांविधानिक प्रावधानों तथा आदर्शों के प्रचार-प्रसार का आह्वान किया था।
पिछले वर्ष आयोजित ‘संविधान दिवस युवा क्लब अभियान’ का उद्देश्य देश भर में लोगों में हमारे संविधान के बारे में जागरूकता के प्रसार के लिए युवाओं को सक्रिय करना था। इसी को आगे ले जाते हुए अब देश के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘केवाईसी -अपना संविधान जानें’ अभियान शीघ्र आरंभ किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से संसद के नए भवन में एक भव्य संविधान कक्ष होगा, जिसमें संविधान की मूल प्रति रखी जाएगी और जो हमारी समृद्ध संसदीय एवं सांविधानिक विरासत को भी प्रदर्शित करेगा। एक नई ऊर्जा के साथ देश के नागरिकों को संविधान एवं संसद से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि स्कूली पाठ्यक्रम में संविधान को एक अलग विषय के रूप में शामिल किया जाए, ताकि हमारे युवा नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग हों और भविष्य के आदर्श नागरिक बनें। ‘राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम’ भी इसी प्रयास का एक हिस्सा है। हमारा दायित्व है कि 21वीं सदी के गौरवशाली राष्ट्र के निर्माण के लिए हम सभी स्वयं को समर्पित करें, ताकि संविधान निर्माताओं ने जो स्वप्न देखा था, उसे हम अपने आत्मविश्वास, परिश्रम एवं संकल्प से फलीभूत करें। आइए, हम 72 वां गणतंत्र दिवस मनाते हुए अपने संविधान की मूल भावना के अनुरूप एक सशक्त-आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का प्रण करें।