भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का मानना है कि यूपीए सरकार की विदाई जल्दी हो सकती है। वह कहते हैं कि सरकार अंतरविरोधों से घिरती जा रही है। वह यह भी कहते हैं कि भाजपा हर तरह की राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करने को तैयार है, फिर यह चुनाव ही क्यों न हो। मौजूदा हालत पर उनसे हरीश लखेड़ा ने बात की....
प्र- तृणमूल कांग्रेस के बाद अब द्रमुक ने भी यूपीए सरकार से नाता तोड़ लिया है। मौजूदा डांवाडोल राजनीतिक परिस्थितियों में मुख्य विपक्षी दल होने के नाते भाजपा आखिर क्या सोच रही है?
हमारा मानना है कि अब यह सरकार ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं है। यह अपने ही अंतर्विरोधों के कारण जल्दी गिर जाएगी। आम आदमी कमरतोड़ महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण बेहाल है, उसकी उम्मीदें इस सरकार से टूट चुकी हैं। संख्या बल के लिहाज से यह सरकार अल्पमत में है, देखने की बात यह है कि आखिर कब तक वह सपा और बसपा जैसे दलों के सहारे टिक पाएगी।
प्र- ऐसी परिस्थितियों में भाजपा की क्या रणनीति है?
भाजपा की नीति किसी भी सरकार को अस्थिर करने की नहीं रही है। हम यह भी जानते हैं कि यदि भाजपा कोशिश करे, तो भी यूपीए सरकार को यूपी बचाने आ जाएगा। यूपी से मेरा मतलब उत्तर प्रदेश की दो पार्टियों सपा और बसपा से है, जो मुसीबत के वक्त हमेशा ही सरकार की बैसाखी बन जाती हैं। इस बार भी तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के समर्थन वापस लेने के बाद अब यूपीए सरकार का भविष्य सपा और बसपा पर टिका है।
प्र- वैसे तो अगले चुनाव के लिए एक वर्ष का समय बाकी है, मगर यदि यह जल्दी हो गए तो क्या भाजपा उसके लिए तैयार है? पार्टी के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं?
भाजपा चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। हम तो लंबे समय से कहते रहे हैं कि लोकसभा के चुनाव जल्दी हो सकते हैं। चुनाव अपने-आप में बड़ी चुनौती होते हैं। लेकिन हमें विश्वास है कि हम आगामी चुनाव में विजय प्राप्त करेंगे, क्योंकि यूपीए सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है।
प्र- आप कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव के लिए तैयार है, लेकिन एनडीए का विस्तार किए बगैर क्या केंद्र में सरकार बनाना संभव हो पाएगा?
एनडीए का निश्चित ही विस्तार होगा। यह विस्तार चुनाव से पहले और बाद में भी होगा। कुछ दल अभी जुड़ेंगे और कुछ बाद में आएंगे।
प्र- लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के तेवर तो कुछ और ही संकेत देते दिख रहे हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में उन्होंने अगले चुनाव में किंग मेकर बनने के संकेत दिए हैं?
नीतीश कुमार ने कोई ऐसा संकेत नहीं दिया है। ऐसा कोई कारण भी नहीं है कि जद (यू) एनडीए से अलग होगा। एनडीए में जद (यू) हमारा विश्वसनीय सहयोगी है और आगे भी बना रहेगा।
प्र- अब आपकी नई टीम पर सभी की नजर है, आपकी टीम कब तक घोषित हो जाएगी और यह कैसी होगी?
होली के बाद नई टीम का ऐलान हो जाएगा। इसमें कोई बड़ा परिवर्तन नहीं है, क्योंकि हम सब कार्यकर्ता तो वही हैं। इन्हीं में से चुनना होता है। हां, इस बार युवा और महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व देखने को मिलेगा। नई टीम में अल्पसंख्यक वर्ग को भी तवज्जो मिलेगी।
प्र- गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में क्या भूमिका रहेगी? क्या वह संसदीय बोर्ड में शामिल हो सकते हैं?
अभी तो यही कहूंगा कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रिय नेता हैं और उनकी प्रभावशाली भूमिका रहेगी।