इस बदलते परिदृश्य में केरल के दिग्गज कांग्रेसी नेता एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी भाजपा में शामिल हो गए हैं। भावुक पिता एके एंटनी ने अपने बेटे के भाजपा में शामिल होने को गलत फैसला बताया। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एंटनी ने कहा, 'यह फैसला वास्तव में दुखद है। मरते दम तक मैं कांग्रेसी रहूंगा। मैं 82 वर्ष का हूं। मेरा जीवन आखिरी पड़ाव पर है। बेटे के भाजपा में शामिल होने पर यह मेरी पहली और आखिरी प्रतिक्रिया है।' यही नहीं, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व कुलपति एवं अल्पसंख्यक नेता को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया है। इस बीच, पद्मश्री से सम्मानित होने के बाद कर्नाटक के बिदरी शिल्प कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। क्या यह सब इस बात का संकेत है कि भाजपा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिश कर रही है, या उसने हिंदुत्व के दर्शन पर चलने की अपनी गति धीमी कर दी है? या यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 2025 में सौ साल पूरे होने के मद्देनजर सोची-समझी रणनीति है?
प्रधानमंत्री की वक्तृत्व कला के जरिये भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव में ईसाइयों का दिल जीत लिया। ईसाई मतदाताओं की मानसिकता में बदलाव की तुलना करके मोदी केरल के ईसाई भाई-बहनों तक अपना संदेश पहुंचा रहे हैं। मोदी ने वेटिकन में पोप पॉल से भी मुलाकात की थी। उन्होंने हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सदस्यों से कहा कि हिंदी पट्टी क्षेत्रों में कुछ राज्यों में पसमांदा मुसलमानों को जोर-शोर से प्रोत्साहित करने के बारे में सुझाव देने की जरूरत नहीं है। उधर हाल ही में दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़ने का दोष राहुल गांधी पर मढ़ा और कहा कि 'उस पार्टी में रहने के लिए रीढ़हीन होना जरूरी है।' उन्होंने अपनी आत्मकथा के विमोचन के बाद स्पष्ट कहा कि अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस का जनाधार सिकुड़ रहा है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, एएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को विधान परिषद में नामित करने के योगी सरकार के प्रस्तावित कदम को आरएसएस द्वारा समर्थित माना जाता है। मंसूर को आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का समर्थन प्राप्त है, जो 2017 से उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। सम्मानित चिकित्सा पेशेवर प्रोफेसर मंसूर ने एएमयू के कुलपति का कार्यभार संभाला था। प्रो मंसूर मोहसिन रजा, बुक्कल नवाब और दानिश आजाद के बाद भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश के उच्च सदन में जाने वाले चौथे मुस्लिम होंगे। समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नौ एमएलसी हैं, जिनमें से दो मुस्लिम हैं-शहनवाज खान और जसमीर अंसारी। जबकि भाजपा के इससे ज्यादा हैं। आखिर यह क्या संकेत देता है? उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी के बाद भाजपा मुसलमानों पर जोर दे रही है। मुस्लिम महिलाओं के हित में तीन तलाक कानून लागू किया गया।
राष्ट्र के मिजाज को भांपते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने चुपचाप 45 सेकंड का एक वीडियो जारी किया, जिसमें पद्मश्री पाने वाले राशिद अहमद कादरी प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए दिख रहे हैं। यह वीडियो न केवल वायरल हुआ, बल्कि राष्ट्रीय खबरिया चैनलों पर इस पर बहस भी हुई। कर्नाटक के प्रतिष्ठित कलाकार कादरी उस वीडियो में कह रहे हैं कि कांग्रेस शासन के दौरान उन्हें सम्मान नहीं मिला, तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। जब भाजपा सत्ता में आई, तो उन्हें लगा कि भगवा पार्टी एक मुस्लिम को सम्मानित नहीं करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें गलत साबित कर दिया।
भाजपा का अल्पसंख्यकों को लुभाने का संकल्प स्पष्ट है। तो क्या आरएसएस-भाजपा की नीति में कोई बदलाव आया है? ज्ञानवापी मामले में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने खुलकर कहा कि 'हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों तलाशें।' हिंदू और मुस्लिम याचिकाकर्ता अदालती आदेश पर ज्ञानव्यापी मस्जिद परिसर के फिल्मांकन को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं या नहीं।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी परोक्ष रूप से भाजपा की मदद करते हैं। ओवैसी ने राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए पूछा, क्या उन्होंने खुद को मार डाला है। यह राहुल गांधी के उस बयान के संदर्भ में था, जिसमें उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोगों के दिमाग में है, लेकिन उन्होंने उसे मार डाला है। ओवैसी ने कहा, 'यह कांग्रेस की स्थिति है। यदि मैं ऐसा कुछ कहूं, तो लोग सोचेंगे कि इसे दौरे पड़ रहे हैं।' यह इस बात का भी संकेत है कि मुसलमान भाजपा विरोधी राहुल गांधी को किस नजर से देखते हैं, जो आए दिन आरएसएस की आलोचना करते रहते हैं।
जब भाजपा अल्पसंख्यक मुद्दों पर ध्यान दे रही है, तो तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जद (यू), बीआरएस और यहां तक कि आप जैसी पार्टियां हनुमान जयंती मना रही हैं। ममता बनर्जी हरेकृष्ण मंदिर जाती हैं। लेकिन द्रमुक दिवाली पर हिंदुओं को शुभकामना नहीं देने के लिए अडिग है, जो तमिलनाडु में दक्षिणपंथियों के लिए परेशानी का कारण है। व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो 2024 के चुनाव तुष्टीकरण के इर्द-गिर्द हो सकते हैं और दिलचस्प यह है कि इसके केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा हो सकती है!