फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विध्वंस और नवनिर्माण के बीच

Sun, 23 Aug 2015 06:34 PM IST
इंदिरा मितल
विज्ञापन
विज्ञापन
मानव के प्रति अमानवीय बर्बरता के असंख्य उदाहरणों का इतिहास साक्षी है। मुगल आक्रमणकारियों द्वारा भारत पर हमले और शासन, इंग्लिस्तान की ट्रेडिंग कंपनी का भारत में प्रवेश और आधिपत्य के दौरान दमन और नृशंसता से इतिहास के पन्ने काले हुए पड़े हैं। विदेशी दमन के शिकार कई अफ्रीकी देशों की हालत आज भी दयनीय है। अफ्रीकियों को बंधुआ दास बनाकर लाने और सदियों तक उनके साथ जानवरों सा सलूक करने वाले अमेरिका जैसे अन्य पश्चिमी देश पश्चाताप की अग्नि में न जाने कब तक झुलसेंगे। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय तक द लैंड ऑफ द राइजिंग सन कहलाए जाने वाले इम्पीरियल जापान की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा निरंकुश हो गई थी और युद्धबंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के लिए सूर्योदय का देश कुख्यात था। जर्मनी में नाजी शासक होलोकॉस्ट द्वारा यहूदियों की जनसंख्या शून्य करने पर आमादा थे। अन्य पश्चिमी देशों में भी यहूदियों के साथ घोर अन्याय हुआ। विपरीत हालात में विजय के दृढ़ संकल्प के कारण यहूदी समुदाय आज विज्ञान, कानून, वित्त और संस्कृति के क्षेत्रों में अग्रणी है। प्रसार और प्रचार के मुख्य साधनों की नकेल साधे यहूदी अपने साथ हुई बर्बरता को न कभी भूलेंगे और न ही जमाने को भूलने देंगे।
विज्ञापन


सवाल यह है कि विश्व के एक ग्लोबल विलेज बनते जाने के परिवेश में कोई भी कौम यदि पुराने घावों को खुरच-खुरच कर हरा रखेगी तो सहअस्तित्व की आकांक्षा क्या धूमिल न रहेगी? हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी को इसी महीने सत्तर वर्ष हो चुके हैं। 1941 में पर्ल हार्बर में अमेरिकी नौसेना के बेड़े पर बमबारी जापान की युद्ध महत्वाकांक्षा की पराकाष्ठा थी। 1945 में यदि उसका मुंहतोड़ जवाब न दिया जाता, तो युद्ध का निष्कर्ष कुछ और हो सकता था। युद्धोन्मुख जापान पर अंकुश लगाने का यही उपाय था। हर वर्ष छह अगस्त को हिरोशिमा और नौ अगस्त को नागासाकी पर अमेरिका के जवाबी आक्रमण को धिक्कारते दुनिया के कोने-कोने से कटु स्वर परमाणु शस्त्रों के पूर्ण बहिष्कार की मांग करते हैं। इतिहास इसका भी साक्षी है कि पर्ल हार्बर पर अप्रत्याशित जापानी हमले से हुई भारी क्षति से तिलमिलाया अमेरिका हिरोशिमा और नागासाकी पर विध्वंसकारी बमबारी के परिणामों को लेकर घोर पश्चाताप से ग्रस्त भी हुआ और प्रायश्चित के रूप में सर्वनष्ट क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में उसने पर्याप्त सहयोग किया।

युद्ध इतिहासकार एवं सांस्कृतिक समीक्षक स्वर्गीय पॉल फुसले ने 1981 में अपने लेख में परमाणु बम को संहारक के साथ-साथ रक्षक भी कहा, क्योंकि युद्धस्तर में अनवरत वृद्धि रोकने का कदाचित यही एक उपाय था, जिससे आक्रमणकारी और आतंकित, दोनों पक्षों में भारी प्राणहानि को रोका जा सका। हिरोशिमा इंटरप्रेटर्ज फॉर पीस नामक  संगठन चलाने वाली केशिको ओगुरा हिरोशिमा पर बमबारी और संहार की आठ वर्षीय प्रत्यक्षदर्शी थीं। फुसेल और ओगुरा, दोनों का नजरिया आम नजरिये से भिन्न है।
विज्ञापन


हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी के रूप में मुंहतोड़ जवाब से जापान की पूर्ण पराजय ने उसकी हिंसक विचारधारा का रुख मोड़कर रख दिया। अहिंसावादी आधुनिक जापान में आज का हिरोशिमा उस मानव संकल्प का ज्वलंत उदाहरण है, जो तबाही को नवनिर्माण में बदल देने का दम रखता है। युद्धप्रवृत्त पुरातन जापान के बिलकुल विपरीत आधुनिक जापान की शांतिप्रियता और कर्मठता तथा अमेरिका का विजयदंभ रहित सौहार्द दुनिया के सामने आदर्श है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें