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क्योंकि नींद है जरूरी: नींद की कमी से मस्तिष्क जल्दी बूढ़ा होता है, 27 हजार ब्रिटिश वयस्कों के डेटा से खुलासा

अबीगैल डोव Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 02 Nov 2025 08:30 AM IST

सार

हम दिमाग की उम्र को बढ़ने से रोक नहीं सकते, लेकिन अपने व्यवहार और जीवनशैली को व्यवस्थित कर उसे कुछ हद तक नियंत्रित जरूर कर सकते हैं।
 
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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock


ब्रिटेन के 40 से 70 साल की आयु के 27 हजार वयस्कों की नींद के व्यवहार और मस्तिष्क के विस्तृत एमआरआई डाटा के आधार पर किए गए हालिया अध्ययन से पता चला है कि जिन लोगों को ठीक से नींद नहीं आई, उनका दिमाग वास्तविक उम्र से ज्यादा बूढ़ा था। हम सभी एक ही गति से बूढ़े होते हैं, लेकिन कुछ लोगों की जैविक घड़ी दूसरों की तुलना में तेज या धीमी चलती है। मस्तिष्क इमेजिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नई प्रगति से शोधकर्ताओं को मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन में पैटर्न के आधार पर किसी व्यक्ति की दिमागी आयु का अनुमान लगाया जा सकता है, जैसे मस्तिष्क के ऊतकों की हानि, कॉर्टेक्स का पतला होना और रक्त वाहिकाओं को नुकसान।


आपकी वास्तविक आयु से ज्यादा उम्र का मस्तिष्क स्वस्थ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से दूर होने का संकेत हो सकता है। पिछले शोधों ने वृद्ध दिखने वाले मस्तिष्क को तेज संज्ञानात्मक गिरावट, मनोभ्रंश के ज्यादा जोखिम और यहां तक कि समय से पहले मृत्यु के खतरे से जोड़ा है। दिमाग की उम्र बढ़ने में थोड़ी-सी भी तेजी समय के साथ बढ़ सकती है, जिससे तंत्रिका संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।


हमने अध्ययन में पाया कि दिमाग और शारीरिक उम्र, दोनों से नींद का गहरा नाता है। नींद में व्यवधान से न सिर्फ दिमाग जल्द बूढ़ा होता है, बल्कि कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ने का जोखिम भी रहता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि हम अपनी नींद को कुछ उपायों से दुरुस्त कर सकते हैं। इसके लिए कुछ सरल रणनीतियां अपना सकते हैं-जैसे नींद का नियमित कार्यक्रम बनाए रखना, सोने से पहले कैफीन, शराब और मोबाइल फोन, टीवी का उपयोग सीमित करना और सोने के लिए अंधेरा और शांत वातावरण बनाना। हम दिमाग की उम्र को बढ़ने से रोक नहीं सकते, लेकिन अपने व्यवहार और जीवनशैली को व्यस्थित कर उसे कुछ हद तक नियंत्रित जरूर कर सकते हैं। इसके लिए अच्छी नींद को प्राथमिकता देनी होगी।

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