थाने में रपट लिखवाना इतना आसान मान लिया गया है कि फिल्मी गानों में भी इसका उल्लेख मिलता है। नायक ने दिल चुरा लिया है और नायिका धौंस दे रही है कि थाने में रपट लिखवा देगी। नायक को तो पता है कि थाने में जाने का मतलब क्या होता है। अभी तो दिल से ही हाथ धोया है, थाने जाकर तो कुछ भी हाथ नहीं आने वाला, इसलिए वह भी धमकी को हवा में उड़ा देता है और गाता है कि लिखवा दे रपट, दिल वापस नहीं करता। नायिका भी हंसकर मामला रफा-दफा कर देती है।
इतनी-सी बात विद्या बालन को समझ में नहीं आई। वह पहुंच गई थाने रपट लिखाने।
रपट लिखवानी है!
क्या हो गया?
मेरा पति खो गया है! विद्या बालन ने यों कहा, जैसे मोबाइल फोन या एटीएम कार्ड खो गया हो।
आपकी शादी कब हुई थी? पुलिस ने जेनुइन सवाल पूछा।
शादी तो नहीं हुई!
अच्छा, तो प्रेमी धोखा दे गया है।
नहीं, वह क्या है कि मुझे झूठी रपट लिखवानी है कि मेरा पति खो गया है।
कमाल करती हैं आप! हम तो सच्ची रपट लिखने में ही इतनी सावधानी बरतते हैं कि परेशान लोग इधर आना छोड़ देते हैं। और आप हैं कि झूठी रपट लिखने के लिए कह रही हैं। वैसे ही हमारे थाने का मिसिंग-पर्सन का कोटा पिछले महीने खत्म हो गया है। उसके बाद छह लड़कियां, दो लड़के और एक बूढ़ा गायब हो चुका है, मगर हमने अभी तक एक की भी रपट नहीं लिखी।
सॉरी, रहने दीजिए, नहीं लिखवानी रपट! कहते हुए वह बाहर निकल गईं। बाहर सादी वर्दी में एक शख्स खड़ा था।
यहां का रेट पांच हजार है, चार हजार में करवा दूंगा। चलिए, तीन हजार ही दे देना। वह बोल रहा था
विद्या बालन पसीना पोंछती यह जा-वह जा हो गईं।
पांच सौ में हो जाएगा, वह कह रहा था।