महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की जिंदगी के अनछुए पहलुओं से रू-ब-रू होना चाहते हैं, तो ‘स्टीफन हॉकिंग : एक महान वैज्ञानिक’ किताब आपकी मदद कर सकती है। मस्तमौलापन और जीतने की जिद हॉकिंग की जिंदगी का एक अहम हिस्सा रही है।
इसकी मिसाल उस दौर में देखने को मिलती है, जब उन्होंने स्नातक की शिक्षा के लिए जद्दोजहद के बाद ऑक्सफोर्ड में नेचुरल साइंस में प्रथम श्रेणी ऑनर्स की डिग्री ली। आगे की पढ़ाई के लिए अपने टीचर्स से बड़ी निर्भीकता से उन्होंने कहा कि-‘अगर प्रथम श्रेणी आई तो कैम्ब्रिज जाऊंगा, द्वितीय श्रेणी आई, तो ऑक्सफोर्ड में ही रहूंगा, आशा है कि मुझे प्रथम श्रेणी मिलेगी।’
यही वह जिद थी, जिसने स्टीफन हॉकिंग को न्यूटन और आइन्स्टीन जैसे महान वैज्ञानिकों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। अंतरिक्ष और ब्लैक होल के रहस्यों से परदा उठाकर उन्होंने साबित कर दिया कि इन्सान ठान ले, तो क्या कुछ नहीं कर सकता! 22 वर्ष की उम्र में मोटर न्यूरॉन जैसी असाध्य बीमारी भी जीतने की उनकी जिद को रोक नहीं सकी।
यह बात हैरान करने के लिए काफी है कि मस्तिष्क को छोड़कर शरीर के सभी अंगों से अपाहिज स्टीफन हॉकिंग 70 वर्ष की उम्र में आज भी कैम्ब्रिज में रिसर्च डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इस महान वैज्ञानिक के बारे में पढ़कर आप भी सकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे।
स्टीफन हॉकिंग : एक महान वैज्ञानिक (जीवनी)
लेखक : विपुल विनोद / नमन विनोद
प्रकाशक : हिन्द पॉकेट बुक्स
मूल्य : 100 रुपये