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धैर्य रखिए, दाल-रोटी भी मिलेगी

Mon, 26 Oct 2015 07:47 PM IST
संतोष त्रिवेदी
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सरकार के विकास मार्ग में सबसे बड़ी बाधा उसका विरोध है। वह इधर काम में जुटती है, उधर विरोधी उसे डिस्टर्ब करने लगते हैं। सरकार को मजबूरन बयान देना पड़ता है। फिर विरोधी उस बयान को ले उड़ते हैं। इससे मासूम बयान को खमियाजा भुगतना पड़ता है। हर चैनल पर उसकी तुड़ाई होती है। इससे बचने के लिए वह स्वयं को तोड़-मरोड़कर सबके आगे प्रस्तुत करता है, पर विरोध को उस पर दया नहीं आती। आखिरकार बयान विकास के रास्ते में घुस जाता है। वहां विरोध की दाल नहीं गलती।
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सरकार का रास्ता विकास का है, जबकि असहिष्णु लोगों का विरोध का। यह विरोध भी केवल लुटियन जोन तक सीमित है। इससे पता चलता है कि असहिष्णुता का रास्ता लंबा नहीं है। विकास का रास्ता लंबा है, इसीलिए उसे पहुंचने में देरी हो रही है। सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मगर इसके लिए जनता को सहिष्णु होना चाहिए। जल, जंगल और जमीन पर सरकार की नजर है। नया विकास-पथ यहीं से होकर गुजरेगा। गरीब, मजदूर और किसान अब भी सरकार के 'मन की बात' सुन रहे हैं। उन्हें पता है कि कभी न कभी विकास रेडियो के रास्ते कूदकर बाहर आएगा। ऐसी सहिष्णुता से ही पिछले सत्तर वर्षों से देश चल रहा है।

सरकार को इन्हीं सहिष्णु ताकतों पर भरोसा है। महंगाई, भ्रष्टाचार और मार-काट की बाधाएं उसकी राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। जो सरकार से सहमत नहीं हैं, उनके लिए उसके पास पिछले कई उदाहरण हैं। वह काम से नहीं, बयान से ही उन्हें चित्त कर देगी। सरकार का मूल-मन्त्र है, सबके प्रति सहिष्णु हो जाओ। इससे सरकार अपना काम करेगी और जनता अपना। दाल महंगी है, तो आलू खाइए। लुटियन जोन में रहने वाले चिप्स खाकर ही विमर्श करते हैं।
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आप सहिष्णु बनिए। अभी तो 'मन की बात' के दो सौ छप्पन एपीसोड आने बाकी हैं। रास्ता लंबा है, पर तय होगा। तब तक आंख-कान को आराम दीजिए, गाजर-मूली का स्टॉक करिए। सरकार विकास और बिहार से फुरसत पा ले, जादू-टोना सीख ले, फिर आपको दाल-रोटी भी खिला देगी।
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