अपने भारत महान के कुछ ऐसे यथार्थ हैं और जिनका सामना करना इतना दुखदायी है कि हम उनकी तरफ देखना नहीं चाहते। लेकिन कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है कि इनकी तरफ देखना ही पड़ता है। उन्नाव की उस युवती की शर्मनाक कहानी ने हमें ऐसा आईना दिखाया है और जिसमें हमको वे सारे यथार्थ स्पष्ट दिखते हैं, जिनको हम देखना नहीं चाहते।
कुछ इसलिए कि हमारी देशभक्ति को चोट पहुंचती है, कुछ इसलिए कि यह यथार्थ हमको डराने का काम करते हैं। पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप ने पहली बार उन्नाव की इस बेटी को न्याय मिलने की थोड़ी-सी आशा जगाई है, लेकिन बात सिर्फ न्याय मिलने या न मिलने की नहीं है। बात इससे कहीं ज्यादा बड़ी है।