फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दीवार खड़ी करने वाले ताऊजी

Sun, 11 Jan 2015 07:43 PM IST
मनु पंवार
विज्ञापन
विज्ञापन
टीवी पर एक सीमेंट कंपनी का विज्ञापन देखा। क्लास में एक सहमा हुआ बच्चा टीचर के पूछने पर बता रहा है कि दीवार दो प्रकार की होती है- अच्छी दीवार और बुरी दीवार। वह उदाहरण देकर बता रहा है कि ताऊजी कहते हैं कि उसके और उसके सबसे अच्छे दोस्त इकबाल के बीच एक दीवार खड़ी हो गई है, लेकिन उसे वह दीवार दिखाई नहीं देती।
विज्ञापन


बच्चा मासूम है। वह झूठ नहीं बोल सकता। अगर कोई दीवार है और उसे दिखाई नहीं दे रही, तो इसमें बच्चे का कोई कसूर नहीं, दोष ताऊजी का है, जिन्होंने बच्चे के मासूम मन में यह बात डाल दी कि दो दिलों के बीच कोई दीवार भी होती है। इसका मतलब यह है कि सारा खेल ताऊजी का रचा हुआ है। मुल्क में जहां-जहां दीवारें खड़ी करने का काम चल रहा है, वहां-वहां कोई न कोई ताऊजी सक्रिय हैं। लेकिन ये ताऊजी हैं कौन, देश की जांच एजेंसियों के लिए इसका पता लगाना चुनौती से कम नहीं।

ताऊजी नाम के किरदार आम तौर पर घरों में अभिभावक की भूमिका में होते हैं। बच्चों के लिए वह प्यार, दुलार और डर- जहां जैसी जरूरत हो, वैसे ही काम आते हैं। लेकिन टीवी के विज्ञापन वाला बच्चा भी दूसरे बच्चों की तरह अबोध है। उसे ताऊजी के असली प्रोफेशन के बारे में नहीं पता। ताऊजी ठेकेदारी करते हैं। दीवार खड़ी करने का ठेका उन्हीं के नाम है। इसीलिए वह बच्चे को सावधान करते हैं कि अब उसके और उसके सबसे अच्छे दोस्त इकबाल के बीच दीवार खड़ी हो गई है, भले बच्चे को वह दिखाई न दे।
विज्ञापन


दरअसल यह कहकर ताऊजी यह सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि उनकी बनाई दीवार बनी रहे। कहीं बच्चों के खेल-खेल में वह ढह गई, तो उनके काम की गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं। फिर उनको क्या मुंह दिखाएंगे, जिनसे दीवार खड़ी करने का ठेका लिया था? इसीलिए वह बच्चे को भय दिखाकर यह पुख्ता कर लेना चाहते हैं कि दीवार की क्वालिटी पर सवाल न उठने पाएं। लेकिन ताऊजी के सामने बच्चे ने एक बड़ी चुनौती रख दी है। ऐसी दीवार खड़ी करके दिखाएं, जो अदृश्य न हो!
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें