मेरे शहर की पुलिस हो चुके अपराध पर मिट्टी डालकर होने जा रहे अपराध पर रोक लगाने में ज्यादा दिलचस्पी लेती है। एक बानगी देखिए-थाने का रमणीय माहौल है। थानेदार साहब झपकी लगाकर लौटे हैं। चाय आ गई है।
क्या सर, गश्त पर चलोगे? सहायक पूछता है।
कुछ खास है क्या आज?
हां, जमाया है कल्लू पहलवान ने कुछ!
चलो, देखते हैं क्या किया है उसने।
तय जगह पर कुछ लोग बैठे बातें कर रहे थे। थानेदार ने उनसे पूछा, कौन-सा क्राइम करने वाले हो आज तुम लोग?
हमें तो कल्लू पहलवान ने कहा था कि यहां पुलिया के नीचे बैठ जाना, क्योंकि अपराधी पुलिया के नीचे बैठकर ही योजना बनाते हैं, सीनियर अपराधी ने कहा।
तुम तो गांजे के साथ पकड़ाए थे, सेठ का घर लूटने जाते समय, थानेदार को चेहरा देखकर याद आया। उस डकैती वाले मामले में फिर क्या हुआ था?
आसपास सेठ का घर ही नहीं था। छूट गए इसी बात पर।
आज क्या इरादा है? थानेदार ने पूछा!
हत्या की सोच रहे हैं। चोरी-चकारी के तो इतने मामले हो गए कि मजा नहीं आ रहा।
ठीक है, पर हथियार हैं या हमें ही देने पड़ेंगे? सीनियर ने चाकू निकालकर दिखा दिया।
अरे, यह नहीं चलेगा। हेड साहब, जरा गाड़ी में से वह बड़ा वाला छुरा निकालना, जो करीम कसाई के यहां से लाए थे। हेड साहब छुरा लेकर आ गए।
काम होने के बाद मुझे मिल जाएगा इनाम में? सीनियर अपराधी ने खुश होकर पूछा।
पहले पकड़े तो जाओ। हां, याद करो। सेठ धनीराम की हत्या करने जा रहे थे कि पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया, हेड साहब ने समझाना चाहा।
अब साहब, इतना भी नया नहीं हूं। आप गिरफ्तार कर लीजिए। बाकी मैं संभाल लूंगा। सीनियर अपराधी यह कहते हुए पुलिस की गाड़ी में बैठ गया। उसके साथी भी बैठ गए।