सर्वोच्च न्यायालय ने संजय दत्त को अवैध हथियार रखने का दोषी माना है और इसके लिए उन्हें पांच वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। इससे पहले टाडा अदालत ने संजय दत्त को छह साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ वह सर्वोच्च अदालत गए थे।
हमारे देश में आर्म्स ऐक्ट, 1959 लागू है, जिसमें आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर संशोधन भी किए गए हैं। इस कानून के तहत लाइसेंस के बिना हथियार रखना जुर्म है। किंतु अगर किसी व्यक्ति के जीवन को खतरा है, तो उसे अपनी रक्षा के लिए आग्नेयास्त्र और कारतूस रखने का अधिकार है।
हथियार रखने का लाइसेंस तभी मिलता है, जब सक्षम अधिकारी यह पाते हैं कि आवेदक को वाकई जान का खतरा है। इस लाइसेंस का समय-समय पर नवीनीकरण भी कराना होता है। इक्कीस वर्ष से कम उम्र के और आपराधिक व हिंसक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले व्यक्ति को लाइसेंस नहीं दिया जाता।
हालांकि लाइसेंस लेने के बाद भी कई तरह के प्रतिबंध होते हैं। मसलन, किसी भी नागरिक के लिए 9 एमएम, पॉइंट 303 ब्रिटिश, पॉइंट 45 एसीपी कैलिबर के आग्नेयास्त्र एवं सेमी ऑटोमैटिक राइफल, शार्ट बैरल शॉटगन, एवं ऑटोमैटिक हथियार रखना प्रतिबंधित है। आर्म्स ऐक्ट के मुताबिक, एक लाइसेंस पर तीन से ज्यादा आग्नेयास्त्र नहीं रखे जा सकते।
इसके अलावा हथियार बनाने, बेचने, आयात-निर्यात करने आदि के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता है। बगैर लाइसेंस आग्नेयास्त्र, बम या कारतूस आदि रखने के मामले में न्यूनतम पांच वर्ष की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा इस कानून के तहत अपराध की प्रकृति के आधार पर विभिन्न मामलों में अलग-अलग सजा का प्रावधान है।