बाइडन प्रशासन ने वैश्विक नियमों की एक प्रणाली स्थापित की और उसका विस्तार भी किया, ताकि उन्नत एआई तकनीकें, खासकर एनवीडिया द्वारा निर्मित चिप चीन की पहुंच से बाहर रहें। उन्हें चिंता थी कि अगर ऐसा हो गया, तो चीन को आर्थिक व सैन्य रूप से भी बढ़त मिलेगी। डीपसीक के विकास ने तीखी बहस छेड़ दी है कि क्या तकनीक पर अमेरिकी नियंत्रण विफल हो गया है। डीपसीक का उभार तो यही बताता है कि बाइडन प्रशासन से कहीं न कहीं कोई बड़ी चूक हुई है। डीपसीक ने बताया है कि उसके मॉडल में जो चिप उपयोग में लिए गए हैं, वे निर्यात नियंत्रण लागू होने के बाद एनवीडिया ने विशेष तौर पर चीनी बाजार के लिए विकसित किए थे।
दरअसल, जब अमेरिका ने 2022 में एनवीडिया के सबसे उन्नत चिप पर प्रतिबंध लगाया, तो एनवीडिया ने उन्हीं चिप की क्षमता को सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से कम कर दिया। ये चिप व्यावहारिक तौर पर वही परिणाम देने की ताकत रखते थे और कानूनी तौर पर इन्हें चीनी बाजार में बेचने पर भी कोई बाधा नहीं थी। इससे बाइडन के अधिकारी नाराज हुए, लेकिन इन चिप पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने में उन्हें करीब एक वर्ष लग गया, जिस दौरान चीनी कंपनियों ने इनके खूब भंडार जमा कर लिए। रैंड कॉरपोरेशन में वरिष्ठ सलाहकार जिमी गुडरिच के अनुसार, ‘अगर बाइडन प्रशासन ने अधिक तेजी दिखाई होती, तो चीन को रोका जा सकता था।’ एनवीडिया और अमेरिकी सरकार, दोनों का मानना है कि चीन के पास ये चिप अगर तस्करी से भी पहुंचे होंगे, तो इनकी मात्रा कम होगी। हैरत की बात है कि पिछले साल मीडिया में भी चिप के चीन पहुंचने को लेकर कई रिपोर्टें प्रकाशित हुई थीं। अब देखना बाकी है कि ट्रंप प्रशासन, इस पर क्या प्रतिक्रिया देगा। डीपसीक के मॉडल की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ 2,000 एनवीडिया चिप का उपयोग हुआ है, जबकि ज्यादातर अमेरिकी कंपनियां चैटबॉट को प्रशिक्षित करने में 16 हजार या इससे ज्यादा चिप उपयोग में ले रही हैं। इससे यह भी प्रतीत होता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने चीनी शोधकर्ताओं को कम में अधिक करने के लिए प्रेरित किया।
एनवीडिया के शेयरों में इस डर से बीते सोमवार को तेज गिरावट आई कि दूसरी कंपनियां भी अब चिप बनाएंगी और इससे एनवीडिया के एकाधिपत्य में कमी आएगी। चीनी फर्म हुआवेई भी चिप विकसित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी वह कमजोर है। डीपसीक बेशक एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन चीन अब तक एडवांस्ड एआई नहीं बना पाया है। डीपसीक जैसे सस्ते मॉडल से एआई की दुनिया बदलने वाली है। सोचने वाली बात यह नहीं है कि डीपसीक आज क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि अगर चीनी कंपनियों को अमेरिकी कंपनियों जैसे संसाधन मिलते, तो वे क्या बना देतीं। ©The New York Times 2025